तारो की बारात सजी हो,
चांदनी में खिला, नीलगगन और धरा सजा हो।
चिड़ियों की तान सजी हो,
सागर के लहरों का संगीत सजा हो।
सुनहरे रेत की सेज सजी हो,
जहाँ मैं रहूँ, वहाँ मेरे ख़यालात सजे हो।
प्रकृति का श्रृंगार किया एक कुटिया सजा हो।
नारियल के ऊँचे-ऊँचे पेड़ सजे हो,
और दूर मल्हार गाते मल्लाह सजे हो।
शांति की आवाम सजी हो,
जहाँ मैं रहूँ, वहां मेरे ख़यालात सजे हो।
न कोई शोर,
बस मेरे ख़यालात के पर सजे हो।
जो मेरे ख़यालो को परवाज दिए,
चाँदनी संग जा मीले हो।
संग हो कोई ऐसा,
जिसकी हर बात और ख़यालात मुझ संग सजी हो।
जिसके बोल कम, हमारे राग ज़्यादा सजे हो।
जहाँ मैं रहूँ, वहाँ मेरे ख़यालात सजे हो।
हमारे ख़यालात सजे हो।
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