क्यों न बेख़यालियों में यूँ ही घूमा करें हम | प्रेम, संवाद और नई शुरुआत की कविता
क्यों न बेख़यालियों में यूँ ही घूमा करें हम Introduction कुछ रिश्ते समय के साथ चुप हो जाते हैं, लेकिन उनका प्रेम कभी समाप्त नहीं होता। केवल संवाद की धूल जम जाती है, जिसे हटाने की आवश्यकता …