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Kyonki meri kahani tum se tak//क्योंकि मेरी कहानी तुम से तुम तक।

क्योंकि मेरी कहानी तुम से तुम तक। Kyonki meri kahani tum se tak.   कविता परिचय: कुछ खूबियां: इमेजरी और भावनात्मक गहराई — "नर्म धूप की चादर", "गिरते गुलमोहर के फूल" जैसी …

इश्क़ के बाद, खुद का ही वजूद ढूंढना पड़ता है...

इश्क़ के बाद, खुद का ही वजूद ढूंढना पड़ता है...  इश्क़ के बाद, खुद का ही वजूद ढूंढना पड़ता है... ढूंढनी पड़ती है — अपनी ही हँसी, अपनी मुस्कान। जीना पड़ता है... क्योंकि साँसें रुकती नहीं। …

किससे कहूं, क्या कहूं, कैसे कहूं?|| kisase kahun kya kahun kaise kahun

किससे कहूं? किससे कहूं, क्या कहूं, कैसे कहूं?|| kisase kahun kya kahun kaise kahun किससे कहूं? चीखती-चिल्लाती रातों की बातें, कान चीरती ख़ामोशी की बातें, सिसकती-सुलगती, जागती आँखों की बाते…

बेशुमार सवाल... किससे?

बेशुमार सवाल... किससे? Beshumar savaal... Kissase? सवाल है....बेशुमार है..... मगर किससे?   तुम्हारी एक ख़ास खुशबू हुआ करती थी  जिसमें मैं वर्षों बाद भी......  तुम्हारे ऐबसेंस में भी महक जाय…

परम्पराओं की छत्री आज थोड़ी नीची कर दूंParamparaon-ki-chatri-aaj-thodi-niche-kr-doon

परम्पराओं की छत्री आज थोड़ी नीची कर दूं। Paramparaon ki chatri aaj thodi nichi kar doon. परम्पराओं की छत्री आज थोड़ी नीची कर दूं। बड़ी जिद्द है खुद से,  कि आज खुद को बाहों में भर लूँ। बहुत दिन…

कैसे कहूँ ! कि वो मेरी रूह का तिश्नगी है।

कैसे कहूँ ! कि वो मेरी रूह का तिश्नगी है।-kaise kahun ki vo meri rooh ka tishnagi hai तिश्नगी,tishnagi,कविता,quotes, शायरी Tishnagi,तिश्नगी कैसे कहूँ ! कि वो मेरी रूह का तिश्नगी है। सम्भव क…

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