kvita

वक्त से कुछ लम्हे निकालकर, आज एक मुलाकात खुद से।

वक्त से कुछ लम्हे निकालकर, आज एक मुलाकात खुद से। वक्त से कुछ लम्हे निकालकर, आज एक मुलाकात खुद से।   वक्त से कुछ लम्हे निकालकर, आज एक मुलाकात खुद से। एक सवाल ख़ुद से, ज़िन्दगी से। क्या खोया ? …

अब तुम्हें ही क्यूँ न खो दूँ ?,कविता, अभिव्यक्ति,100 and above poem, kavita collection.

अब तुम्हें ही क्यूँ न खो दूँ ?   अब तुम्हें ही क्यूँ न खो दूँ ? तुम्हे पाने की जद में बस खोया ही तो है, अब तुम्हें ही क्यूँ न खो दूँ ? क्यूँ झूठी कशिश के पीछे, ये जिंदगी कसमकस में डालूं। …

हाय....! ये अंदाज तेरा.... नवम्बर के गुनगुणी धूप सा है।

हाय....! ये अंदाज तेरा.... नवम्बर के गुनगुणी धूप सा है। Haay-ye-andaz-tera-november-ke-gunguni-dhup-sa-hai हाय....! ये अंदाज तेरा.... नवम्बर के गुनगुणी धूप सा है। हाय....! ये अंदाज तेरा..…

Load More
That is All