कहाँ से लाते इतनी ज़ुर्रत_Kahaan-se-laate-itni-jurrat!

कहाँ से लाते इतनी जुर्रत!

Kahaan-se-laate-itni-jurrat!


कहाँ से लाते इतनी जुर्रत

तुम बस एक बार sorry तो कह देते।
क्या पता हम फिर, तुमको माफ कर ही देते।

लेकिन कहाँ तुममे इतनी इंसानियत
कि खुद की गलतियों की भी मुझपर दी तोहमत ।

कहाँ से लाते इतनी जुर्रत ?

मुझसे नहीं, उस खुदा से ही डरते,
जिसके नाम की ढोंग तुम रचते।

जिसके पीछे भागे हो अब तुम।
सच बोलो,
कि उसकी भी इज्जत रख पाए हो तुम।

जिस जिस की खाई थी कसमे,
आत्मा होगी, उसकी भी जद में।

कि जिस रिस्ते की अब देते दुहाई,
अचानक ही तो बीच न आई।

तुम्ही छोड़ आए थे सबकुछ,
और कसम खाकर, नया करने की कुछ,
तुमने तो उजाड़ ही दी सबकुछ।

फिर आई याद वही सबकुछ,
तोड़ चले सब , खाई जो कसमे
कोई जिए या कोई मरे,
तुम  तो रहेंगे, बस अपने ही धुन में।

प्रभु करे कभी ये धुन टूट न पाए,
तुम भी एक दिन खाली मेरे जैसे ही बन जाए।

कहाँ से लाते इतनी जुर्रत



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Aparichita-अपरिचिताकुछ अपने, कुछ पराए, कुछ अंजाने अज़नबी के दिल तक पहुँचने का सफर। aparichita-अपरिचिता इसमें लिखे अल्फ़ाज़ अमर रहेंगे, मैं रहूं न रहूं, उम्मीद है, दिल के बिखड़े टुकड़ो को संभालने का सफर जरूर आसान करेगी। aparichita-अपरिचिता इसमें कुछ अपने, कुछ अपनो के जज़बात की कहानी, उम्मीद है आपके भी दिल तक जाएगी।




Shikha Bhardwaj

















1 Comments

If you have any doubt, please let me know.

  1. बहुत खूब लिखा है, आपने
    आत्मविश्वास से आत्मबल प्राप्त होता है
    कायरता, अविश्वास से इंसान हमेशा रोता

    ReplyDelete
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