तुम्हारी ही बातें होंगी | यादों, प्रेम और अधूरे एहसासों पर एक भावपूर्ण हिंदी कविता

तुम्हारी ही बातें होंगी | यादों, प्रेम और अधूरे एहसासों पर एक भावपूर्ण हिंदी कविता



तुम्हारी ही बातें होंगी

जब कोई व्यक्ति साथ नहीं रहता, तब उसकी यादें हमारे जीवन का हिस्सा बन जाती हैं...

कुछ रिश्ते समय के साथ समाप्त नहीं होते।

वे बदल जाते हैं—कभी स्मृतियों में, कभी खामोशियों में, तो कभी उन अधूरे सपनों में जो आँखें बंद करते ही फिर से जीवित हो उठते हैं।

यह कविता ऐसे ही एक भाव की अभिव्यक्ति है। उस एहसास की, जहाँ किसी का अस्तित्व भले ही हमारे सामने न हो, लेकिन उसकी उपस्थिति हर पल महसूस होती रहे।

तुम्हारी ही बातें होंगी

अब तुम नहीं,
तुम्हारी बातें ही होंगी।

वजूद में नहीं,
बस एहसासों में होंगी।

चूड़ियों की खनक में न सही,
इन सूनी कलाइयों की खामोशी में होंगी।

जब भी देखूँगी आईना,
सूनेपन के प्रतिबिंब में
तुम्हारी यादें होंगी।

श्रृंगार में न सही,
प्रतीक्षा की लंबी राहों में होंगी।

प्रत्यक्ष नहीं,
विरह के विस्तार में होंगी।

अब सिर्फ तुम्हारी ही बातें होंगी।

सबब भी तुम,
बेसबब भी तुम।

पूर्ण नहीं,
मेरे अधूरे ख्वाबों में तुम।

स्याह रातों से लेकर
रेशमी किरणों तक,

हर पल,
सिर्फ तुम्हारी ही बातें होंगी।

सार्थक नहीं,
मेरे हर प्रयास में होंगी।

वर्तमान और भविष्य
भले ही बदल जाएँ,

उपसर्ग और प्रत्यय बदल सकते हैं,

पर तुम मेरे हर शब्द का मूल रहोगे।

दुनिया के रिश्ते चाहे जैसे हों,

कुछ संबंध समय से नहीं टूटते।

वे बस यादों में अपना घर बना लेते हैं।

वजूद में नहीं,

पर एहसासों में...

अब सिर्फ तुम्हारी ही बातें होंगी।

लेखक की कलम से

यह कविता मैंने लगभग छह वर्ष पहले लिखी थी।

उस समय शायद मैं केवल एक भावना को शब्द देना चाहती थी। आज, वर्षों बाद जब इसे दोबारा पढ़ती हूँ, तो महसूस होता है कि कुछ भावनाएँ समय के साथ पुरानी नहीं होतीं—वे केवल और गहरी हो जाती हैं।

"तुम्हारी ही बातें होंगी" किसी एक व्यक्ति की कहानी नहीं है।

यह उन सभी लोगों की कहानी है जिन्होंने कभी किसी अपने को खोया है—चाहे वह प्रेम हो, कोई रिश्ता, कोई सपना, या जीवन का कोई खूबसूरत अध्याय।

यह कविता अधूरेपन में भी पूर्णता खोजने की कोशिश है।

क्योंकि कभी-कभी...

लोग चले जाते हैं, लेकिन उनकी यादें हमारे भीतर हमेशा जीवित रहती हैं।

निष्कर्ष

यदि इस कविता ने आपके मन की किसी भावना को छुआ हो, तो अपनी प्रतिक्रिया टिप्पणी में अवश्य साझा करें।

आपके शब्द मेरी लेखनी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

धन्यवाद।

— Shikha Bhardwaj
Aparichita

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Shikha Bhardwaj

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