बचपन कब बीत गया पता ही नहीं चला | एक भावुक हिंदी कविता


Aparichita

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बचपन कब बीत गया पता ही नहीं चला

Childhood memories 



बचपन सच में जीवन का सबसे अमीर समय होता है,
हालाँकि उस उम्र में हमारे पास न पैसा होता है, न समझ।

फिर भी एक छोटी-सी गुल्लक में पूरा संसार बस जाता था।
कुछ कंचे, कुछ खिलौने, दो-चार दोस्त और शाम तक चलने वाले खेल — बस यही जिंदगी थी।

समय के साथ हम बड़े तो हो जाते हैं, लेकिन शायद भीतर कहीं वही बच्चा हमेशा रह जाता है, जो आज भी किसी पुराने गाने, किसी गली या किसी मिट्टी की खुशबू में अपना बचपन ढूँढ़ता है।

इसी भावना को शब्द देने की एक छोटी कोशिश—


## बचपन बीत गया  

*— Aparichita*


बचपन बीत गया

बचपन बीत गया 
खेल-खिलौनों और किलकारियों के,
न जाने कैसे साथ छूट गया,
बचपन बीत गया।

वो भी क्या दिन थे,
जब गुल्लक में संसार बसते थे,
और हर गली - मुहल्ले में एक ,
 कोई वज़ीर तो कोई बादशाह बनता था।

जब बादशाहों की टोली निकलती थी,
तो क्या राजा और क्या फ़कीर
सबकी अपनी ही एक शान होती थी।
बचपन बीत गया। 

बाबा का राजदुलारा तो,
माँ की आँखो का तारा होता था।
फिर आए किशोर दिनों के किस्से,
कुछ नादानियाँ, कुछ व्यवहार,
और साथ लंगोटिया यारों का।

बचपन बीत गया। 

जवानी आई और गुजर गई,
भविष्य की परछाईं साथ ले आई।
तिनका-तिनका जोड़ने की ज़िद ने
न जाने कितने वसंत और सावन
यूँ ही गंवा दिए।

बचपन बीत गया। 

 जवानी आई और गुजर गई,
भविष्य की परछाईं साथ ले आई।
तिनका-तिनका जोड़ने की ज़िद ने
न जाने कितने वसंत और सावन
यूँ ही गंवा दिए।


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बचपन आखिर इतना याद क्यों आता है?

क्योंकि बचपन में जिंदगी कठिन कम और सच्ची ज्यादा होती थी।

तब रिश्तों में दिखावा कम था।
दोस्ती मतलब साथ खेलना था।
खुशी छोटी चीज़ों में मिल जाती थी।

लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, जीवन जिम्मेदारियों, भविष्य और संघर्षों में उलझने लगता है।
धीरे-धीरे वही इंसान, जो कभी बारिश में भीगकर खुश हो जाता था, अब मौसम देखने से पहले काम और समय देखने लगता है।

शायद इसलिए बचपन केवल उम्र नहीं, एक एहसास बन जाता है।

निष्कर्ष

समय आगे बढ़ जाता है,
लेकिन बचपन कभी पूरी तरह नहीं जाता।

वह हमारे भीतर कहीं चुपचाप जिंदा रहता है—
पुरानी तस्वीरों में, पुराने दोस्तों में, और उन यादों में जिन्हें हम व्यस्त जीवन के बीच अचानक याद कर लेते हैं।

और शायद इसी का नाम जीवन है।


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  • About the Author
    I Shikha, writes on Aparichita to explore life, emotions, spirituality, and quiet reflections of the soul. My words often come from small moments of life — a silent evening, a sky full of stars, or a thought that refuses to stay unspoken.




    Shikha Bhardwaj

    Hi, I'm Shikha. I help English learners improve vocabulary, grammar, speaking confidence, and communication skills through practical lessons and real-life examples.

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