तू दिखा तेरी औकात,
कितना निचे गिर सकता तू।
तुझे तो अब जबाब मेरी खामोशी ही देगी।
माना ये वक्त तेरा है, कल भी तेरा ही हो।
लेकिन ये ख़ामोशी बेचैनी बढ़ा देगी।
गर तुझमे इंसानियत बची होगी।
पर कहाँ !
तुझे तो शौख है दिलो से खेलने का ,
खेल ,पर सोच जब ये वक्त ,
कभी तुम्हे भी चुप करा देगा ,
उस वक्त भी
तुझे जबाब मेरी खामोशी ही देगी।
और ये खामोशी बेचैनी बढ़ा देगी।
मुझे यक़ीन है , ये ओहदे की
जो तूने आँखों पर चस्मा चढ़ा रखी है ,
उतरेगा जब , उस दिन तू भी
बस मेरी तरह खाली रह जाएगा।
बाकि का हिसाब प्रभु लगा लेंगे।
उस दिन मेरी ख़ामोशी खनख़ना उठेगी।
तू बस दिखाता जा तेरी औकात ,
कितना निचे गिर सकता तू।
तुझे तो अब जवाब मेरी ख़ामोशी ही देगी।
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