जीने दे जिंदगी




जीने दे जिंदगी ।

हुई हमसे गलती,

 कि बाँध ली हमने उम्मीदों की पोटरी।

 हाथ जोड़ करती हूं बंदगी , 

कि जिस तरह ,

 उम्मीदों के बाजार में किया है निलाम, 

ठीक उसी तरह  कर दे खतम,

यादो से भरी कोहराम।

तरह - तरह के खोखले वादों में जो,

भरे थे कूट -  कूट के साजिशों के रंग,

अब भी दिमागों की कोठरी में है बंद ।

जो जीने नही देती, करती है तंग।

जीने दे जिंदगी।

यादे ! जो दिमाग की कुंडियाँ खटखटाती है

और झकझोर देती है वक्त - वेवक्त ।

ये धड़कने बढ़ाकर, साँसों को तो रोकती है ,

लेकिन करती नही प्राणों से तंग।

बस बेदम कर छोड़ती है ,

और विश्वासों से सारा नाता तोड़ती है।

बाग़ीचे , जहाँ शिर्फ़ फूलो से नाता दिखता था,

जिनके रंग हुए बेरंग, 

अब तो बस काँटो ने जाल बिछाया है।

जो मन को छलनी कर जाती है,

और शूल दिलों में भर जाती है।

माना मैंने, कि हुई मुझसे गलती,

और बांध ली उम्मीदों की पोटरी।

माफ कर दे मुझे,

और जीने दे जिंदगी।

एक खाश काम अधूरे है,

है एक फर्ज जो पूरे करने है।

हौसला दे मुझे,

 और जीने दे जिंदगी।

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Shikha Bhardwaj

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