#pagli si vo ladk_पगली सी वो लड़की
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#खामोशियाँ-pagli si vo ladki_पगली सी वो लड़की #पलक के पर्दे_palak ke parde
| Khamoshiyan,खामोशियाँ, शायरी |
| Khamoshiyan,खामोशियाँ, शायरी,अपरिचिता से परीचित एहसास। |
Khamoshiyan,खामोशियाँ, शायरी,
दरम्यां खामोशियाँ इतनी बढी है,
कि बस अब ज़िंदगी की शाम चाहिए।
रह जाए मेरे अल्फ़ाज़,
और तुम्हारी कानो में शोर करे,
वक्त पर लिखा वो किताब चाहिए।
तुम भी मुड़ के देखो,
उन बीते लम्हो को जो तुम्हारा आईना बने,
औऱ हिसाब करो गुनाहों को
समय का वो जोड़दार तमाच चाहिए।
✍️Shikha Bhardwaj❣️
Bahut sundar rachnae
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