तुम्हारी यादों का पहड़ा।
मेरी सोच पर तुम्हारी यादो का पहरा,
जैसे हो मन का घाव गहरा।
बस ख़ामोशी का मन्तजर, घना अंधेरा,
न तुम न सुनहरा अल्फाज़ हमारा।
मेरी सोच पर तुम्हारी यादो का पहरा,
निःशब्द, निःसंकेत कर लिया किनारा।
एक बार तो बताते पेशोपेश तुम्हारा,
क्या कशमकश थी क्या उहापोह तुम्हारा।
मेरी सोच पर तुम्हारी यादो का पहरा,
क्यों खो गया वो ख्वाबो का गुलिस्तां हमारा।
जहाँ मैं थी, तुम थे धड़कनों का शोर हमारा।
मोगरे सी महकती वादों की ख़ुशबू हमारी
और एकांत में महफ़िल सा एहसास हमारा।
मेरी सोच पर तुम्हारी यादो का पहरा,
सब है, तुम नही, बस यादो का ही आसरा।
क्या कहूँ कि तुम बिन भी गुज़र रहा समय हमारा।
कैसे कहूँ , हँसी है,पर ख़ुशी न लौटेगी दुबारा।
मेरी सोच पर हमेसा रहेगी , तुम्हारी यादो का पहरा।
#Meri_soch_pr_tumhari_yaadon_ka_pahda
"तुम्हारी यादों का पहड़ा।"
Aparichita हरदम हरवक्त आपके साथ है। Aparichita कुछ अपने, कुछ पराए, कुछ अंजाने अज़नबी के दिल तक पहुँचने का सफर। aparichita इसमें लिखे अल्फ़ाज़ अमर रहेंगे, मैं रहूं न रहूं, उम्मीद है, दिल के बिखड़े टुकड़ो को संभालने का सफर जरूर आसान करेगी। aparichita, इसमें कुछ अपने, कुछ अपनो के जज़बात की कहानी, उम्मीद है आपके भी दिल तक जाएगी।
अपरिचिता से परीचित के सफर में आज फिर आपके लिए एक नई कविता नए विचारों के साथ अपने पाठक के सामने रखना चाहती हूँ , उम्मीद है, आप सबको पसंद आएगी।
धन्यवाद
✍️Shikha Bhardwaj❣️

वाह वाह क्या बात है।। बहुत खूब
ReplyDeleteशुभ संध्या
आपका आभार भाईसाहब🙏🙏
ReplyDeleteलाजवाब👌👌
ReplyDeleteशुभ संध्या
लाजवाब👌👌
ReplyDeleteशुभ संध्या