जाती हुई दिसम्बर..... और आती हुई जनवरी की धुँध संग...

जाती हुई दिसम्बर..... 
और आती हुई जनवरी की धुँध संग...

जाती हुई दिसम्बर..... 
और आती हुई जनवरी की धुँध संग...


Ise bhi dekhen:---

जाती हुई दिसम्बर..... 
और आती हुई जनवरी की धुँध संग,
एक आकृति आकर बसी, मेरे अंतर्मन।
वही आहट, वही अपनापन...
काश......! 
चलता फिर वही समय का चक्र...
सारे बिगड़े सवार कर,
मैं कर लेता तुमको आलिंगन।
या फिर हाथ पकड़ मैं भी घुल जाता,
खो जाता उसी धुँध संग।
जो आकृति बसी मेरे अंतर्मन।

जाती हुई दिसम्बर..... 
और आती हुई जनवरी की धुँध संग...

गुजरे वक्त से लम्हें चुराकर...
उसे पलको पर अपने सजाकर...
हर रात....सिरहाने बुला लेता,
शब्दों में अपनी सज़ा लेता...
फिर गुनगुनाता यूँ ही रात भर...
जैसे जिंदगी का आखिरी होता वो सफऱ।

जाती हुई दिसम्बर..... 
और आती हुई जनवरी की धुँध संग...


#अपरिचिता, #अभिव्यक्ति, #कविता, #abhivyakti, #शायरी, #quotes, #Aparichita, #kavita, #Hindi_poetry, #Poetry, #sad_Poetry, #romantic_poetry, #you_tube_Video

#जाती_हुई_दिसम्बर_और_आती_हुई_जनवरी_की_धुँध_संग...

Shikha Bhardwaj

Hi, I'm Shikha. I help English learners improve vocabulary, grammar, speaking confidence, and communication skills through practical lessons and real-life examples.

Post a Comment

If you have any doubt, please let me know.

Previous Post Next Post