मैं ऐसी ही हूँ।
Mai aisi hi hoon.
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मैं ऐसी ही हूँ-Mai aisi hi hoon.
मैं ऐसी ही हूँ,
मुझे समझने की भूल न कर।
कहीं न कहीं....
तुम्हारा ही अक्स हूँ।
तू बस समझ खुद को।
तू खुद से ही कुछ सवाल कर।
दिल अक्सर बच्चा ही होता है।
बच्चें की तरह खिलखिला।
शिखा की बस सीख यही....
क्यूँ बीते कल की हो मजबूत पकड़....
बीते लम्हों की अच्छी यादे कैद कर.....
खुशी इसी पल तलाश कर।
क्या हो अगर......
जिंदगी की आखिरी पल यही,
क्यूँ कल जिसे देखा नही....
उसके लिए
आज की खुशी बस जाया करे हम !
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चलो दुनिया थोड़ी छोटी करे....
कुछ उदास चेहरे को खुशी के रंग भरे।
तुम्हारा ही अक्स हूँ....
मैं ऐसी ही हूँ।
कुछ पल साथ का.....
खुशी के एहसास का....
कुछ हरकते....
कुछ शरारतें आज खर्च कर।
वक़्त के संदुकचे से......
बचपन आज़ाद कर।
चुभती तो है मुझे भी.....नाफ़रमानी तेरी
मुझे समझने की भूल न कर।
तू खुद को टटोल....जो तुझे दुखता....
वही तोड़ता है मुझे भी...
बहुत मुश्किल नही समझना मुझे भी।
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