ऐ दिल चलो कुछ नया करते हैं ।
तोड़ पुराने बंधन,
कुछ आज़ाद साँसे लेते हैं।
अपने लिए जीते हैं।
बहुत हुआ किसी की ख़ातिर,
ख़ुद को बस बदलते जाना।
जहाँ प्यार , वहाँ नुस्ख नहीं,
अब तो खुद को समझाना ही होगा।
कभी रस्मो और रिस्तो के नाम पर,
मन की बली को बचाना होगा।
एक ही ज़िन्दगी है,
फिर क्यूँ इतनी मौते मरना!
जो चलकर आया पास वो तुम्हारा है,
जाने वाले को कौन रोक पाता है।
उसको तो बस बहाना आता है।
गर जो ठान लिया उसने कि जाना है,
फिर तो तुम मरो !
इससे न उसका कोई ताना - बाना है।
वो सही, और तुम्हारा बस गलती से नाता है।
इसलिए ऐ मन सब छोड़,
अब बस खुद के लिए जी और
ले प्रण न अश्रु बहाने का।
समझ ये तुम्हारा दान नया जीवन का,
अब बस इसे ही अनमोल बनाने का।
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