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| "धरती माँ की पुकार – आइए, मिलकर अपनी धरा को बचाएँ।" |
मेरी धरा – धरती माँ की मौन पुकार.
प्रस्तावना
धरती केवल मिट्टी का एक गोला नहीं, बल्कि समस्त जीवन का आधार है। आज विकास की अंधी दौड़ में हमने अपनी ही धरा को इतना घायल कर दिया है कि वह मौन होकर भी अपनी पीड़ा व्यक्त कर रही है। यह कविता उसी वेदना, चेतावनी और प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी को समर्पित है।
मेरी धरा
अब बस रोती, बिलखती और सिसकती मेरी धरा।
जो कभी थी निर्मल हवाओं का संसार,
आज बन गई है दूषित धुएँ का अंबार—
मेरी धरा।
नदियाँ थीं इसकी धमनियाँ,
जिनमें बहता था जीवन रूपी अमृत।
जलचर हँसते-खेलते थे उनमें,
और हरियाली को मिलता था जीवन।
आज वही नदियाँ
रसायनों और प्लास्टिक का भंडार बन गई हैं—
मेरी धरा।
विकास के नाम पर
हमने सब कुछ कर दिया बर्बाद।
आज लाचार और असहाय खड़ी है
मेरी धरा।
जंगल काट दिए, पहाड़ चीर दिए,
निर्दोष जीवों का कर दिया संहार।
जो प्रकृति और मानव
एक-दूसरे के सहचर थे,
उन्हीं के साथ करते रहे अत्याचार—
मेरी धरा।
जहाँ देखो, वहाँ कूड़े और गंदगी का अंबार।
उस पर खनन और खुदाई का अत्याचार।
ग्लेशियर भी पिघल पड़े दर्द से,
और बन गईं विनाशकारी बाढ़ें—
मेरी धरा।
रुक जा, थम जा, हे मनुष्य!
तू सभी जीवों में श्रेष्ठ कहलाता है।
अब चेतने की घड़ी आ चुकी है।
ये बाढ़, ये सुनामी,
ये भूकंप, ये महामारी—
प्रकृति का क्रोध नहीं,
हमारे कर्मों का परिणाम हैं।
सोचो,
यदि धरा ही नहीं रहेगी,
तो क्या तुम भी बच पाओगे?
आज भी वह
रो रही है, बिलख रही है,
सिसक रही है—
मेरी धरा।
कविता का भावार्थ
यह कविता धरती माँ की उस पीड़ा को व्यक्त करती है जो मानव द्वारा किए गए प्रदूषण, वनों की कटाई, प्लास्टिक कचरे, रासायनिक प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन से उत्पन्न हुई है। कविता हमें याद दिलाती है कि यदि हमने समय रहते प्रकृति का सम्मान नहीं किया, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य छोड़ना संभव नहीं होगा।
इस कविता से मिलने वाली सीख
प्रकृति हमारी सबसे बड़ी धरोहर है।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन आवश्यक है।
प्लास्टिक और प्रदूषण को कम करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
पेड़ लगाना और जल संरक्षण समय की आवश्यकता है।
धरती को बचाना ही मानवता को बचाना है।
निष्कर्ष
धरती हमें बिना किसी अपेक्षा के जीवन देती है। अब समय आ गया है कि हम भी उसके प्रति अपना कर्तव्य निभाएँ। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर हम अपनी धरा को फिर से हरा-भरा और स्वच्छ बना सकते हैं।
"धरती हमारी नहीं, हम धरती के हैं। इसे बचाना हमारा सबसे बड़ा धर्म है।"
Call-to-Action (CTA)
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आपके विचार हमारे लिए अनमोल हैं। कृपया नीचे कमेंट करके बताइए कि आप पर्यावरण संरक्षण के लिए कौन-सा छोटा कदम उठाने का संकल्प लेते हैं।
FAQs
1. "मेरी धरा" कविता किस विषय पर आधारित है?
यह कविता पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन पर आधारित है।
2. कविता का मुख्य संदेश क्या है?
धरती को बचाना ही मानव जीवन और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखना है।
3. हम पर्यावरण संरक्षण में क्या योगदान दे सकते हैं?
पेड़ लगाकर, प्लास्टिक का कम उपयोग करके, जल बचाकर और स्वच्छता बनाए रखकर।
4. यह कविता विद्यार्थियों के लिए क्यों उपयोगी है?
यह पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाती है और नैतिक शिक्षा भी देती है।
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