"दोस्ती" एक रिश्ता, अनमोल, अनुपम, न्यारा सा।
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"दोस्ती" "Dosti" |
इसके बाद बात आती है दोस्ती की, ये महाशय भी तो ढाई अक्षर के ही हैं, और सब रिस्तो में नायाब। अगर जिंदगी में आपको कोई सच्चा दोस्त मिल जाये, तो वो आपके लिए आपका आईना होता है, जहाँ होता तो वो है, पर उसमे आपकी ही प्रतिबिम्ब झलकती है।जीवन के हर पहलू हर राज एक-दूसरे के लिए पारदर्शी होते हैं, जहाँ शब्दों की जरूरत कम परती है।
दोस्त वो होता है जो एकतरफ आपकी खूबी को तराशकर उभारता है तो दूसरी तरफ आपकी ख़ामियों को आपकी जिंदगी से विलीन करता है।जितना ही वो आपकी ख़ुशी में खुश होता है, उतना ही आपकी परेशानियों में ग़मगीन। सच्चे दोस्तों की जिंदगी में कभी आपके लिए कोई सीमा नही होती और न ही उनके पास आपके लीये फुरसतो के पलों की कमी होती है।
"दोस्ती" एक रिश्ता, अनमोल, अनुपम, न्यारा सा।
"दोस्ती" एक रिश्ता, अनमोल, अनुपम, न्यारा सा।
न कोई बंधन, न सीमाओं की दीवार खड़ी,
जैसे लहराता उन्मुक्त विचारों सा।
"दोस्ती" वक्तों की पावंदी से पड़े,
जब देखो, द्वारे आन खड़े।
औपचारिकता की पाठ से न कोई दूर का नाता।
कब लड़ जाता, कब ढेरो लाड़ लड़ाता।
एक "दोस्त" ही जाने, दोस्त के मन की व्यथा,
माँ की डांट हो या, पिता के तेज का गुस्सा
सबके आरे आता, दोस्त मेरा, अजूबा सा।
बारिश में छत्री सा, तो तेज़ धूप में साये सा
तो कभी "दोस्त" मेरा, ठहरे जल में कंकड़ सा,
कभी उथल-पुथल सब कर जाता,
तो कभी, बिगड़े मेरे काम बनाता।
लेक़िन कल कुछ बिखड़ा सा था,
होगी कोई वजह जो उखड़ा सा था।
झूठी मुस्कान लिए "दोस्त" मेरा....
जरा उदास सा था।
ऐसा ही है "दोस्त" मेरा,
मेरी उदासी झट दूर भगाता,
लेक़िन खुद की परेशानी में,
न कभी मेरी फिक्र बढ़ाता।
"दोस्ती" एक रिश्ता, अनमोल, अनुपम, न्यारा सा।
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Shikha Bhardwaj__✍️
सच्चा दोस्त आपको आपकी उन खूबियों से भी परिचय कराता है, जिससे आप खुद अनजान होते हो।
उन खुशकिस्मतो में से मैं भी एक हूँ। मुझे नही पता कि मैं कैसा लिखती हूँ, पर हाँ उसकी प्रोत्साहन ने मुझे जरूर प्रेरित किया, मैं ये भी नही जानती को वो मेरी सच्ची तारीफ करता है या झूठी, लेकिन मैं खुश हो जाती हूँ, और पुरे confidence के साथ लिखती हुँ।इसके व्यूज भी आ रहे हैं।मैं कितनी सही हूँ ये तो आपलोग ही बता पाएंगे, पर जिस तरह से अपने भावो को लिखित रूप दे पा रही हूँ, इसमे उसका बड़ा योगदान है।
वक्त बदलता है , विचारों में दरार आ सकते हैं, पर उसकी रिक्तियों को कोई नही भर सकता।
इसलिये जिंदगी में दोस्त बनाते चलिए।संभव हो तो संसार के हर कोने से, न जाने किससे क्या सीखने को मिले। हो सकता है, शुरू में एक-दूसरे को समझने में दिक्कतें आए, लेकिन अगर कस्तूरी की महक चाहिए तो जंगल में भटकना ही पड़ेगा।

बहुत सुंदर प्रस्तुति।
ReplyDeleteदोस्ती एक प्यारा सा एहसास, दोस्त होते हैं खास
वो लोग खुशकिस्मत होते हैं, जिंदगी में जिसके होते हैं दोस्त!!