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टूटी उम्मीदों और पुरानी यादों के दर्द से निकलकर फिर से जिंदगी जीने की प्रेरणा देती भावुक हिंदी कविता—जीने दे जिंदगी। |
जीने दे जिंदगी: जब उम्मीदों का बोझ यादों से भारी हो जाए
कभी-कभी जिंदगी हमें दुख नहीं देती, हमारी अपनी उम्मीदें हमें तोड़ देती हैं।
हम किसी पर विश्वास करते हैं। कुछ रिश्तों से उम्मीद लगाते हैं। कुछ सपने देखते हैं और मन ही मन एक ऐसी दुनिया बना लेते हैं, जिसमें सब कुछ वैसा ही होगा जैसा हमने सोचा है।
लेकिन जिंदगी हमेशा हमारी कल्पना के अनुसार नहीं चलती।
कुछ वादे खोखले निकलते हैं, कुछ रिश्ते अपना रंग बदल लेते हैं और कुछ यादें ऐसी होती हैं जिन्हें हम पीछे छोड़ना चाहते हैं, लेकिन वे बार-बार लौटकर हमारे मन की कुंडियाँ खटखटाती रहती हैं।
तब मन बस एक ही बात कहना चाहता है—
“मुझे मेरी जिंदगी वापस दे दो...
मुझे जीने दो जिंदगी।”
जीने दे जिंदगी
हुई हमसे गलती,
कि बाँध ली हमने
उम्मीदों की एक पोटली।
हाथ जोड़ करती हूँ बंदगी—
कि जिस तरह
उम्मीदों के बाजार में
किया है मुझे नीलाम,
ठीक उसी तरह
कर दे खत्म
यादों से उठता यह कोहराम।
तरह-तरह के खोखले वादों में
जो भर दिए थे
कूट-कूटकर साज़िशों के रंग,
आज भी दिमाग की कोठरी में
बंद पड़े हैं वे सारे प्रसंग।
जो जीने नहीं देते,
हर पल करते हैं तंग।
जीने दे जिंदगी...
यादें—
जो दिमाग की कुंडियाँ खटखटाती हैं,
और झकझोर देती हैं
वक्त-बेवक्त।
धड़कनों को बढ़ाकर,
साँसों को थाम तो लेती हैं,
मगर प्राणों से
नाता नहीं तोड़तीं—
बस बेदम-सा कर छोड़ती हैं।
और धीरे-धीरे
विश्वासों से
सारा नाता तोड़ती हैं।
वे बागीचे,
जहाँ कभी
सिर्फ फूलों से नाता था,
जिनके हर रंग में
जीवन मुस्कुराता था—
आज वही रंग
बेरंग हो गए हैं।
अब तो बस
काँटों ने जाल बिछाया है,
हर राह को
शूलों से सजाया है।
जो मन को छलनी कर जाते हैं,
और दिल में
अनगिनत काँटे भर जाते हैं।
माना मैंने—
हुई मुझसे गलती,
और बाँध ली मैंने
उम्मीदों की पोटली।
माफ़ कर दे मुझे...
और—
जीने दे जिंदगी।
एक खास काम अधूरा है,
एक फ़र्ज़ अभी पूरा करना है।
टूट गई हूँ,
मगर खत्म नहीं हुई हूँ।
बस थोड़ा-सा
हौसला दे मुझे...
और—
जीने दे जिंदगी।
उम्मीदों की पोटली
हुई हमसे गलती,
कि बाँध ली हमने
उम्मीदों की एक पोटली।
हाथ जोड़ करती हूँ बंदगी—
कि जिस तरह
उम्मीदों के बाजार में
किया है मुझे नीलाम,
ठीक उसी तरह
कर दे खत्म
यादों से उठता यह कोहराम।
तरह-तरह के खोखले वादों में
जो भर दिए थे
कूट-कूटकर साज़िशों के रंग,
आज भी दिमाग की कोठरी में
बंद पड़े हैं वे सारे प्रसंग।
जो जीने नहीं देते,
हर पल करते हैं तंग।
जीने दे जिंदगी...
कभी-कभी हम अपने साथ बहुत सारी उम्मीदें बाँध लेते हैं।
हमें लगता है कि सामने वाला हमें समझेगा, हमारा साथ देगा, हमारे विश्वास की कद्र करेगा।
लेकिन जब उम्मीदें टूटती हैं तो केवल एक रिश्ता नहीं टूटता—हमारे भीतर का विश्वास भी कहीं दरक जाता है।
और तब सबसे मुश्किल काम होता है खुद को फिर से समेटना।
यादें क्यों पीछा नहीं छोड़तीं?
यादें—
जो दिमाग की कुंडियाँ खटखटाती हैं,
और झकझोर देती हैं
वक्त-बेवक्त।
धड़कनों को बढ़ाकर,
साँसों को थाम तो लेती हैं,
मगर प्राणों से
नाता नहीं तोड़तीं—
बस बेदम-सा कर छोड़ती हैं।
और धीरे-धीरे
विश्वासों से
सारा नाता तोड़ती हैं।
कुछ यादें तस्वीरों की तरह होती हैं।
हम उन्हें देखना नहीं चाहते, फिर भी वे सामने आ जाती हैं।
कभी कोई जगह उन्हें जगा देती है।
कभी कोई शब्द।
कभी कोई चेहरा।
और कभी बिना किसी कारण के ही मन के भीतर कोई पुराना दरवाजा खुल जाता है।
हम वर्तमान में होते हैं, लेकिन मन अचानक अतीत में पहुँच जाता है।
शायद इसलिए यादों से लड़ना हमेशा संभव नहीं होता।
कभी-कभी उन्हें स्वीकार करके आगे बढ़ना ही बेहतर होता है।
जब फूलों का बागीचा काँटों से भर जाए
वे बागीचे,
जहाँ कभी
सिर्फ फूलों से नाता था,
जिनके हर रंग में
जीवन मुस्कुराता था—
आज वही रंग
बेरंग हो गए हैं।
अब तो बस
काँटों ने जाल बिछाया है,
हर राह को
शूलों से सजाया है।
जो मन को छलनी कर जाते हैं,
और दिल में
अनगिनत काँटे भर जाते हैं।
जिंदगी में कुछ लोग और कुछ रिश्ते हमारे लिए बागीचे जैसे होते हैं।
हम वहाँ सुकून ढूँढ़ते हैं।
लेकिन जब वही जगह दर्द देने लगे तो फूलों के बीच भी काँटे दिखाई देने लगते हैं।
फिर सवाल यह नहीं रह जाता कि “मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ?”
सवाल यह बन जाता है—
“अब मैं अपने लिए क्या करूँ?”
और शायद यहीं से healing की शुरुआत होती है।
हर गलती जिंदगी का अंत नहीं होती
माना मैंने—
हुई मुझसे गलती,
और बाँध ली मैंने
उम्मीदों की पोटली।
माफ़ कर दे मुझे...
और—
जीने दे जिंदगी।
हम अक्सर अपनी गलतियों को लेकर खुद को बहुत लंबे समय तक सज़ा देते रहते हैं।
हम सोचते हैं—
काश मैंने भरोसा न किया होता।
काश मैंने उम्मीद न की होती।
काश मैंने उस रिश्ते को इतना महत्व न दिया होता।
लेकिन उस समय जो हमने किया, वह उस समय हमारी समझ और हमारी भावनाओं के अनुसार सही लगा होगा।
गलती होना इंसान होने का हिस्सा है।
लेकिन एक गलती को अपनी पूरी जिंदगी की पहचान बना लेना—यह जरूरी नहीं।
जो बीत गया, उसे बदला नहीं जा सकता।
लेकिन उसके बाद की जिंदगी अभी भी हमारे हाथ में है।
अभी कुछ अधूरा है
एक खास काम अधूरा है,
एक फ़र्ज़ अभी पूरा करना है।
टूट गई हूँ,
मगर खत्म नहीं हुई हूँ।
बस थोड़ा-सा
हौसला दे मुझे...
और—
जीने दे जिंदगी।
शायद जिंदगी हमें हर बार इसलिए नहीं बचाती कि हम बहुत मजबूत हैं।
कभी-कभी वह इसलिए बचाती है क्योंकि हमारा सफर अभी पूरा नहीं हुआ।
कोई जिम्मेदारी बाकी है।
कोई सपना बाकी है।
किसी का हाथ थामना बाकी है।
किसी को अपना प्यार देना बाकी है।
या शायद सबसे जरूरी—
खुद से फिर मिलने का काम बाकी है।
जिंदगी से एक छोटी-सी प्रार्थना
अगर आज आपके भीतर भी कोई पुरानी याद शोर कर रही है...
अगर किसी टूटे हुए भरोसे का बोझ अभी भी आपके मन पर है...
अगर आपको लगता है कि उम्मीद करना आपकी सबसे बड़ी गलती थी...
तो शायद आपको खुद को दोष देने के बजाय थोड़ा रुककर कहना चाहिए—
हाँ, मुझसे गलती हुई थी।
हाँ, मुझे चोट लगी थी।
हाँ, मैं टूट गई थी।
लेकिन मेरी कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
क्योंकि—
एक बुरा अध्याय पूरी किताब नहीं होता।
और शायद जिंदगी से हमारी सबसे बड़ी प्रार्थना यही होनी चाहिए—
मुझे मेरे अतीत से मुक्त कर,
मेरे आज को जीने दे।
जो खो गया उसे याद करने दे,
मगर उसमें डूबने मत दे।
थोड़ा दर्द दे,
मगर हौसला भी दे...
और जीने दे जिंदगी।
निष्कर्ष
उम्मीदें टूट सकती हैं।
रिश्ते बदल सकते हैं।
यादें दर्द दे सकती हैं।
लोग हमें निराश कर सकते हैं।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि जिंदगी भी खत्म हो गई।
कभी-कभी हमें दूसरों से नहीं, अपने भीतर से अनुमति लेनी पड़ती है—फिर से जीने की।
अतीत को मिटाना जरूरी नहीं।
बस इतना जरूरी है कि वह हमारे वर्तमान की साँसें न रोक दे।
जो हुआ, वह हमारी कहानी का एक हिस्सा है।
पूरी कहानी नहीं।
इसलिए आज खुद से एक वादा कीजिए—
मैं अपनी उम्मीदों को समझूँगी,
अपनी गलतियों को माफ़ करूँगी,
अपनी यादों को स्वीकार करूँगी,
और फिर...
धीरे-धीरे...
अपनी जिंदगी जीऊँगी।
💛 एक छोटी-सी बात आपसे
अगर इस कविता या लेख की किसी पंक्ति ने आपके दिल को छुआ है, तो इसे किसी ऐसे व्यक्ति तक जरूर पहुँचाइए जिसे आज इसकी जरूरत हो सकती है।
और अगर आप चाहें, नीचे कमेंट में सिर्फ इतना लिखिए—
“मैं फिर से जीना चाहती/चाहता हूँ।”
शायद आपका यह एक वाक्य किसी और के लिए उम्मीद बन जाए।
— आपकी जिंदगी अभी खत्म नहीं हुई है।
एक नया अध्याय अभी बाकी है।
