खंडहरी प्यार, quotes, शायरी
खंडहरी प्यार, quotes, शायरी
ग़लती तुम्हारी नही,
तुम्हे तो शौख है खेलने का।
मैं प्यार समझ बैठी।
तुम सौदाग़री में मशगूल रहे,
मैं तुम्हारी इनायत समझ बैठी।
उतरा जब नक़ाब तुम्हारा,
मैं खंडहर सी बूत खड़ी रही।
तुम छायादार बटवृक्ष बन गए।
जाने वो खंडहर,
जिनकी ईंट सी कोशिकाओं में,
तुम्हारे जड़ नासूर बन,
गैंगरीन सा लाईलाज रोग बन गए।
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✍️Upeksha❣️ |
