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हमारे ख़ामोश अल्फ़ाज़ ने 
पूरी उपन्यास लिख दी है।
लोग कहते हैं इसमें पढ़ने को क्या है?
जब तक मुहब्बत फना न हो,
कोई हीर-राँझा, 
और सलिम-अनारकली नही बनता।





*Shikha Bhardwaj


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