आँखों के बरामदे बैठी रात | एक रात, तन्हाई और अधूरी बातों की कविता
कुछ रातें नींद नहीं लातीं… वे हमारे पास बैठकर हमारी खामोशी सुनती हैं। आँखों के बरामदे बैठी रात | एक रात, तन्हाई और अधूरी बातों की कविता 🌙 आँखों के बरामदे बैठी रात कुछ रातें सिर्फ रात नहीं…