इश्क़ के बाद, खुद का ही वजूद ढूंढना पड़ता है...
इश्क़ के बाद, खुद का ही वजूद ढूंढना पड़ता है... इश्क़ के बाद, खुद का ही वजूद ढूंढना पड़ता है... ढूंढनी पड़ती है — अपनी ही हँसी, अपनी मुस्कान। जीना पड़ता है... क्योंकि साँसें रुकती नहीं। …
इश्क़ के बाद, खुद का ही वजूद ढूंढना पड़ता है... इश्क़ के बाद, खुद का ही वजूद ढूंढना पड़ता है... ढूंढनी पड़ती है — अपनी ही हँसी, अपनी मुस्कान। जीना पड़ता है... क्योंकि साँसें रुकती नहीं। …
ये कैसी ख़ामोशी है? Ye kaisi khamoshi hai? ये कैसी ख़ामोशी है? ये कैसी ख़ामोशी है? बस शोर किए जा रही है। हर पल हर जगह। उन यादों से उन लम्हों से... जितना ही भागती हूं.... बस मुझे कैद किए ज…