चलो आज इस धुँध में ही कुछ ख़्वाहिश ढूंढ लेते हैं-chalo aaj is dhundh me hi kuch khwahishen dhundh lete hain.
चलो आज इस धुँध में ही, कुछ ख़्वाहिश ढूंढ लेते हैं..... चलो आज इस धुँध में ही, कुछ ख़्वाहिश ढूंढ लेते हैं..... कुछ प्रीत के अलाव जलाते है, कुछ बिखरे रीत की माला पिरोते हैं। कुछ बुझे से चेह…