देख जिंदगी! हर सुबह, स्वर्णिम क्षण है लाती।


देख जिंदगी! हर सुबह, स्वर्णिम क्षण है लाती।


देख जिंदगी! हर सुबह, स्वर्णिम क्षण है लाती।



 कविता परिचय :--
                   जिंदगी में बहुत सारी तकलीफों , मुसीबतो और मायूसियों का सामना करना पड़ता है , इसका अर्थ ये नहीं कि हम निराश होकर बैठ जाए और अपनी किस्मतो को या फिर कभी दूसरे को कोसते रहे। भगवान जब एक रास्ता बंद करता है तो जरूर ही कोई नया और   शानदार मंजिल की तरफ दूसरा रास्ता बना देता है। जरूरत होती है हमें नजर उठाकर उसे देखने की, समझने की और आगे बढ़ने की।  भगवान भी कोशिश करने वाले की ही मदद करते हैं, इसलिए हौसले के साथ आगे बढ़ते रहिए।
                                                                                                              

देख जिंदगी! हर सुबह, स्वर्णिम क्षण है लाती।

देख जिंदगी! हर सुबह, स्वर्णिम क्षण है लाती।

                                          

देख जिंदगी! हर सुबह, स्वर्णिम क्षण है लाती।
भले ही बाद, हर अंधियारी रात के है आती,
पर नई आशाओं को नई दिशा है दिखलाती।
और प्रभा, उषा की किरणों को जग में फैलाती।
भगा जग के अँधियारो को, 
मन का भी तो ज्योत जलाती।

देख जिंदगी! हर सुबह, स्वर्णिम क्षण है लाती।
मन मे भी जितने है, विषाद के घेरे,
कर दूर उनको तू खुद को निर्मल कर ले,
ऐ ज़िन्दगी कुछ सबक तू इस भोर प्रभा से ले- ले।
कैसे चीर तम को, है किया जग उजाला।
और चहुँ ओर बस फैलाया, उजियारा।

देख जिंदगी! हर सुबह, स्वर्णिम क्षण है लाती।
फ़िर क्यूँ तू मन को बोझिल कर बैठ जाती ?
देख जरा! जब न थकी, और न थकेगी उषा,
फिर क्यूँ तू खुद से ही, इतने में ही है रूसा।
तू उठ, हाथ बढ़ा, और पकड़ हौसले की प्रत्यूषा।

देख जिंदगी! हर सुबह, स्वर्णिम क्षण है लाती।
तू भी जगा, जो है मन में सोई ऊर्जा की क्रांति।
भूल विरह और विपत को, 
और ज्योत कर, फैला नई चेतना की बाती।
सोच जरा, कि मन ही तेरा समर है जिसमे, 
भय और अभय दोनों की जगराती।

देख जिंदगी! हर सुबह, स्वर्णिम क्षण है लाती।
है तेरे ऊपर तेरा मन क्या निश्चय कर पाती,
चुनेगा तू अभय का ही रास्ता,
या पछाड़ तुझे, भय ही जीत की मंजिल चुन पाती।
सोच ज़िन्दगी, कर दृढ़ निश्चय मन की अहाति,
पुकार रही, प्रभा की उषा, नए ज्ञान का किरण लिए।
बस यही लिए, आगे बढ़ता जा तू।

देख ज़िन्दगी! हर सुबह स्वर्णिम क्षण है लाती।

* Har rang kuch  kahta hai me padhiye ise bhi






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                        Aparichita__✍️







साथियों मुझे उम्मीद  है, मेरी ये कविता आप लोगो को पसंद आएगी और इस भाग-दौर की जिंदगी और तनाव से भरे माहौल में कुछ राहत की नर्म हवा आपके रूह को छूकर शीतलता प्रदान करेगी। 
दोस्तों अगर मेरी ये कविता आपलोगो को पसंद आए ,तो कृपया follow जरूर करे और कमेंट बॉक्स में नए सुझाव भी दे। 
आपका बहुत- बहुत आभार। 


                                .✍️Aparichita🍂














 

Shikha Bhardwaj

Hi, I'm Shikha. I help English learners improve vocabulary, grammar, speaking confidence, and communication skills through practical lessons and real-life examples.

2 Comments

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  1. बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति है आपकी धन्यवाद जी

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  2. बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति है आपकी धन्यवाद जी

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