05 अगस्त 2020 इस युग का स्वर्णिम दिन।
श्री राम-जानकी अयोध्या मंदिर शिलान्यास।
श्री राम-जानकी अयोध्या मंदिर शिलान्यास।
आज देश का स्वर्णिम इतिहास लिखा जाएगा और हम इसके साक्ष्य होंगे, सोचकर ही मन प्रफुल्लित हो उठता है। शब्द नही है पर धड़कने बढ़ रही है।न जाने चारो ओर कैसी मनोरम छटा छाई हुई है। आज के सूर्योदय में अलग ही चमक है, जैसे वो रोज की तरह सिर्फ उगी नही है बल्कि खुद अपने ही किरणों से खुद को सजाकर श्री राम के दर्शन को आई हैं।चिड़ियों के चहचहाहट में भी राम धुन ही सुनाई पड़ती है और पवन के बयार ने जैसे राम नाम की खुशबू से सारे जग को महकाया है।
हम अपने भाग्य को जितना सराहे उतना कम है कि हम इस स्वर्णिम छन के सहभागी हो सके।न जाने कितने महान आत्मा आँखो में ये स्वप्न संजोये परलोक सिधार गए,और उनकी ईच्छा अधूरी ही रह गई।
जब बाबरी विध्वंस हुआ था तब मैं करीब 10 साल की रही होउंगी, मुझे याद है कि उसकी आँच सीतामढ़ी तक पहुँची थी, वहां भी कुछ भयंकर तरीके से ही विनाश लीला रची गई थी। विनाश का बहुत ज्यादा तो नही पर इतना याद है कि तभी सबको ये विस्वास हो गया था कि अब राम मंदिर बन जायेगा।
पर बड़े अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि पहले बाहरी आताताइयों ने फिर देश के कुछ राजनीतिक पार्टीयों ने अपनी तुष्टिकरण के लिये राम लला को न जाने कितने दशकों से पंडाल में बैठा रखा था।
देश आज आजाद हो गया। जी हां सही सुना आपने देश सही मायने में आज आजाद हुआ है।
जो देश श्री राम को ही अपना आदर्श, अपना राजा मानता था, जिन्हें पुरुषों में उत्तम की उपाधि अर्थात पुरुषोत्तम राम मानते थे, उन्ही को एक पंडाल में बैठा रखा था ,कितना दुर्भाग्यपूर्ण था हमारी संस्कृति के लिए।
गुस्सा तो बहुत आ रहा है, पर आज मैं नकारात्मक बातों से दूर रहना और रखना भी चाहूँगी।
आज सिर्फ खुशी का दिन है।आज मै खुद को, अपने देश को देश वाशियों को और सबसे ज्यादा तत्कालिन प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी को शुभकामनाएं देना चाहूंगी, जिनकी वजह से आज खुद उनको और हम सभी को ये स्वर्णिम दिन के साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। साथ ही उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को भी जिनकी शासन व्यवस्था के अंतर्गत इस कार्य को सम्पन्न किया जा रहा है।
टेलीविजन पर ही सही, अयोध्या को इस तरह केशरिया रंगो से,दीपों से,लाइट से,और फूलो से सजा हुआ देखकर मन मंत्रमुग्ध हुए जा रहा है। कोरोना ने सभी को मजबूरियों के दायरे में बांध रखा है, जिसके कारण हरकोइ वहां नही जा सकता, पर जानती हूँ कि मेरी तरह ही सभी की इच्छा हो रही होगी कि काश वहां जा सकते।लेकिन कोई बात नही ये अंत नही शुरुआत है।
आज शाम को जब हम अपने घरों में दीप जलाएंगे तो सही मायने में वो दीवाली होगी, क्योंकि दीवाली उन्ही के वन से आगमन की ख़ुशी में मनानी शुरू हुई थी।
कहने को, लिखने को बहुत कुछ है किन्तु शुभकामनाओं के साथ बात यहीं खत्म करूँगी, क्योंकि आज देश का सबसे बड़ा पर्व है, इस पर्व में घर से ही सही सम्मिलित होइये, ख़ुशी मनाइये और इस 500 साल के अंतराल के बाद इस स्वर्णिम इतिहास के साक्ष्य बनने का सौभाग्य प्राप्त कीजिये।
💐 💐जय सियाराम💐💐
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हमारी संस्कृति
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