Tumhare alfaaz,तुम्हारे अल्फ़ाज़,कविता, शायरी
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Tumhare alfaaz,तुम्हारे अल्फ़ाज़,कविता, शायरी,परीचित सी abhivyakti.
Tumhare alfaaz,तुम्हारे अल्फ़ाज़.
बहुत दिनों बाद आज फिर, गुज़रे वक्त के आगोश में, कुछ पुराने पन्ने पढ़ने लगी। ख़ुद को शायरा समझ बैठी थी, वहम टूटते देर न लगी। हर पन्ने को जोड़कर देखा, बस तुम्हारी ही कहानी निकली हर लफ़्ज, तुमसे सुरु, हर अल्फ़ाज़ तुमपर ख़तम निकली। हवाओं की सरगोशियों को भी देखो, ख़ुशबू भी तुम्हारी ही खींच लाई है। खुद को भी, तुझमे ही ढूंढने लगी। क्या हूँ मैं ! कुछ भी नही। हर एहसास, नाम और मकाम, तुझसे ही जुड़ी निकली। हर कहानी तुम्हारी ही निकली।
✍️Shikha Bhardwaj❣️
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