यूँ जो तुम मुझे बेवज़ह ही.

यूँ जो तुम मुझे बेवज़ह ही ...

यूँ जो तुम मुझे बेवज़ह ही ...



 यूँ जो तुम मुझे बेवज़ह ही ...

अच्छे लगने लगे हो......!

क्या करूँ जो.....

अनायास ही ख़यालो से निकल..

सामने बैठ मेरे... मुस्कुराने लगे हो..

जैसे खबर ही नही तुम्हे...

ये जो तुम्हारी मुस्कुराहट.…

मेरी अधरों पर आ ठहरती है...

कितना मुश्किल है कि..

सवालों के फेहरिस्तों से साक्षात्कार होना...

तुम तो वेवजह ही...

अनायास अधरों पर मुस्कान छोड़ जाते हो...

लेक़िन....बिना कुछ कहे....

वो लोगो के हज़ारों निःशब्द सवाल...

मेरे पलकों पर  बोझ बन नैनों के चिलमन हो जाते हैं ।

सुना था...कि ईश्क़ ले डूबती है।

आज तुम्हारी बातों में आकर जाना..

ये सिर्फ़ डुबाती नही....

ये तो वो भँवर है...

जो बस गोल-गोल घुमाती हैं...

न पार लगाती है...न डुबाती है।

यूँ जो तुम मुझे बेवज़ह ही ...

अच्छे लगने लगे हो......!



✍️Shikha Bhardwaj ❣️

Post a Comment

If you have any doubt, please let me know.

Previous Post Next Post