"हम तो हिले हुए हैं",kya aap bhi kabhi yun hi khayaalo me dur tk gae hain?या फिर कभी एकदम बचपनें या फिर जवानी की शोख़ मचलती वादियों में घूमने का मन किया है?

"हम तो हिले हुए हैं।"


 "हम तो हिले हुए हैं",kya aap bhi kabhi yun hi khayaalo me dur tk gae hain?या फिर कभी एकदम बचपनें  या फिर जवानी की शोख़ मचलती वादियों में घूमने का मन किया है?


"हम तो हिले हुए हैं।"
माफ कीजिएगा, ये लाइन मेरी नहीं  है।
ये किसी TV show के interview में कंगना राणावत की  है।
ऐसे तो मुझे बॉलीवुड के कई कलाकार अच्छे लगते है, पर मैं फैन किसी की भी नही हूँ।पर कुछ महीनो से कंगना रनौत का जो बिंदास interview आ रहा है, मैं सच में पहली बार उनकी फैन हो गई हूं।
"मैं हिली हुई हूँ।"न जाने कैसे, पर इस लाइन ने जैसे मुझपर जादू कर दिया है।
हम सारी जिंदगी जब से होश सम्भाले है , किसी न किसी को खुश करने में लगे है और पता चलता है खुद का ही अस्तित्व न जाने कहाँ खो गया है? और आखिर में दूसरे के जीवन में रंग भरते - भरते खुद ही बेरंग हो जाते हैं। वही तन्हाई, वही अकेलापन, वही खामोशी।
फिर कहीं से पवन का एक झोंका आता है और अपनेपन का एहसास दिलाता है, तबतक जबतक की आप पूरी तरह से उसकी गिरफ्त में नही आ जाते हैं।
कितनी अच्छी लगने लगती है उसकी सारी बाते, जैसे वो आपके लियेे ही बना हो। गलती से पहले आपसे उसकी मुुलाकात नही हुुुई। बन्दा चाहे कीतना भी दूर क्यो न हो पर उसकी बातोंं की महक आप तक आती रहती है।उसकी बोली हुई हर एक लब्ज पान में डाले हुए गुलकन्द और केेेसर के  समान होती है।आप अपने करीबी को तो बन्द आंखो से ही महसूस कर सकते हो, पर वो  आपके सामने जो वजूद में तो नहीं है लेकिन आपके आस - पास जो हवााएं बह रही है उसके हर कण में वो मौजूद है।उसकी उपस्थिति न होते हुए भी आप उसके साथ हँसते हैंं, बोलते हैं, खुश होते हैं।आपके बालो को जो ये हवा उड़ा कर गईं हैं,उसमे उसी की तो शरारतें मौजूद होती हैं ।जब भी लड़खड़ाते हुुुए गिरते-गिरते बचते हो, उसी का सहारा तो होता है, जो आपको बचाताा है।आप इतने खुुुश हो जातेे हो कि बस अब सब कुुुछ पा गये हो, और जिंदगी से कुुुछ नहीं चाहिए।इतना ही नहीं आप उसके साथ उस जगह की सैर कर आते हो जिसे आपने जिंदगी में देेेखा तक नहीं है। चाहे वो अमेरिका का नियाग्रा फॉल हो, मेंघालााय की बारिश हो, antarkatika का ब्लू गलेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेसीयर्स, जापान का Arashiyama bamboo groove, turkey के hot air baloon की सैर, फ्रांस का Provence lavender field, हिमाचल की पहाड़ियां या नैनीताल की सर्दी।सबकुछ - सबजगह एक छन में। shifaun की सााड़ियो का get up और वो।कभी बारिश में चाय का मजा लेेेते हुुुए तो कभी बर्फ्फीली बादीयो में आग के अलाव के साथ कहबे की चुस्की, थोड़ी नोक -झोक और ढ़ेर सारा प्यार, कभी सुुुनसान हाईवे पर मद्धम बारिश में धीरे - धीरे two wheeler की सवारी और जब आप उस सैर के आदी हो जातेे हो तो अचानक ही आपको वहम का एहसास होता है।आपको उस हकीकत की जमीन का एहसास होता है, जहां कई दिबारो से बनी दो - चार कमरे जिसको घर कहते हैैं।
वही दिनचर्या, वही आवोहवा, वही झिक - झिक।
क्यो हम सारी जिंदगी उनको ख़ुश करने में बिता देते है,जिन्हें हमारी परवाह नही। वो जो कभी अपने होते हैं कभी वो जो आपकी धड़कने बढ़ाते हैं और सिर्फ बढ़ाते जाते है पर कभी आपको समेट नही पाते।
क्यों हम उनको ही खुश करने में लगे होते हैं जो कभी नाम के अपने होते हैं, और कभी अनचाहे ही आपकी सोच पर हावी हो जाते  हैं और पहले से भी ज़्यादा आपको तन्हा कर जाते हैं।
हम ख़ुद को प्यार क्यों नही कर सकते ? हम वो क्यों नही करते जो हमे ख़ुशी देती है। कबतक हम चेहरे पर उधार का  मुस्कुराहट वाली प्राइमर लगाकर घूमते रहेंगे।दुनिया में बहुत सारे अनाथ है, 
क्यों न हम उसके लिये कुछ करे, जिसे हमारी जरूरत है। बहुत सारी खुले आसमान के नीचे पत्थरों के बिस्तर है, बहुत सारे मासूम बच्चे हैं, जिनकी हाथों में खाली कटोरे हैं, सहानुभूतियों के लिए बहुत सारी तरसती आंखे हैं, दो मीठे बोल सुन सके, उनके लिए तरसती काने हैं, थोड़ी सी मिठास पाने के लिये न जाने कब से लपलपाती जीभ है।
        क्यों न कभी इनकी जिंदगी की मिठास, सुकून दिलासा, इनके चेहरे की मुस्कुराहट बन कर देखे।
आपके कारण अगर किसी के चेहरे पर सच्ची वाली मुस्कुराहट आती है, तो इससे बड़ा सुकून  जिंदगी में नहीं है।
और ये सब हिले हुए लोग ही कर सकते है। बुद्धिजीवी तो बहुत सारी नियमो के साथ काम करते है।
देखेंगे, सोचेंगे करेंगे,और न जाने क्या - क्या।
ख़ुशी हमारे आस पास ही है, जरूरत है सही दिशा की, जरूरत है समझने की,  कि किसे हमारी जरूरत सच में है।

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