मेरे क़िस्मत की स्याही के न जाने कौन - से रंग ?
पर इतना जरूर है पता कि
जिस रंग स्याही, कागज़ भी है उसी रंग।
सब धुंधला, सब पुता हुआ सा।
गर्दिशे जिंदगी में खोए ,सुकूँ के सारे शब्द।
मेरे किस्मत की स्याही के न जाने कौन - से रंग ?
जिस रंग स्याही कागज भी है उसी रंग।
पन्ने जिंदगी के पलट ही जाते हैं,
पर नही दिखता, किसी का संग।
सभी रास्ते अनगढ़-अनमने से,
जिसपर चल पड़ी हूँ कर विचारो को तंग।
मेरी किस्मत की स्याही के न जाने कौन - से रंग।
जिस रंग स्याही, कागज़ भी है उसी रंग।
रिस्तो की तो फौज हो जैसे
पर न मिला, जिंदगी का परसर्ग।
सभी ढकोसले और खोखले से,
बाते बड़ी और दिल से तंग।
मेरी किस्मत की स्याही के न जाने कौन से रंग।
