तुम क्या थे! जिंदगी में कि वहम बहुत था।
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तुम क्या थे! जिंदगी में कि वहम बहुत था। |
तुम क्या थे जिंदगी में, कि वहम बहुत था।
हर एक चेहरे में वफ़ा का नूर बहुत था।
आईना तो तब दिखा है, जब साथ तेरा ,
मुझसे छुटा और तू दूर बहुत है।
बड़ा ही आसान काम है मुस्कुराना भी,
जब मालूम हो उसके दुखो का पता भी बस यही है।
मजा तो आता है , मुस्कुराने में मुझे भी,
हालत तब बयाँ होती है, जब मैं होती हूँ और तन्हाई भी।
तुम थे कि विसाले यार बहुत था,
अब ये है कि तनहाई है, और सफ़र लंबा बहुत है।
अब तो जो है, ईलतजा यही है, खुदा खुश हो,
और मेरी साँसे मुझसे नाख़ुश हो।
तुम क्या थे! जिंदगी में कि वहम बहुत था।
हर एक चेहरे में वफ़ा का नूर बहुत था।
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