भगवान राम के द्वारा गाया हुआ बहुत ही सुंदर मनमोहक शिव स्तुति, सारे कष्ट को नाश करने वाला हर वक्त साथ देने वाला। इसको गाइए, मन को शांति मिलेगी।
Namaami shambhu, शिव स्तुति।
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| नमामि शम्भू, shiv stuti. |
नमामि शम्भूम पुरुषम पुराणम नमामि सर्वज्ञमपरभावम।
नमामि रुद्रम प्रभुमक्ष्यं तं नमामि सर्वशिरसा नमामि।१
श्री राम बोले- मैं पुराणपुरुष शम्भू को नमस्कार करता हूँ, जिनका असीम सत्ता का पार नही है उन सर्वज्ञ शिव को मैं प्रणाम करता हूँ, अविनाशी प्रभु रुद्र को मैं प्रणाम करता हूँ, सबका संहार करने वाले सर्व को मस्तक झुकाकर नमस्कार करता हूँ।🙏
नमामि देवम परमव्यतम उमापतिम लोकगुरुतं नमामि।
नामामी दारिद्रविदारनम तं नमामि रोगापरहम नमामि।।२
अविनाशी परमदेव को नमस्कार करता हूँ। लोकगुरूउमापति को प्रणाम करता हूँ। दरिद्रता को विदीर्ण करने वाले शिव को नमस्कार करता हूँ। रोगों का नाश करने वाले माहेश्वर को प्रणाम करता हूँ।।
नमामि कल्याणमचिंत्यरूपम नामामि विशोध्वबिजरूपम।
नमामि, विष्वस्थितिकारणं तं नमामि संहार नमामि।।३
जिनका रूप चिंतन का विषय न हो, उन कल्याणमय शिव को नमस्कार करता हूँ। जगत का पालन करने वाले, परमात्मा को नमस्कार करता हूँ। संहारकारी रुद्र को नमस्कार करता हूँ,नमस्कार करता हूँ।
नमामि गौरीप्रियंव्ययम तं नमामि नित्यं क्षरमक्षरम तम।
नमामि चिद्रूपममयभावँ त्रिलोचन तं शिरसा नमामि।।४
पार्वती जी के प्रियतम अविनासी प्रभु को नमस्कार करता हूँ।नित्य क्षर- अक्षरस्वरूप शंकर को प्रणाम करता हूँ।जिनका स्वरूप चिन्मय है और अप्रमेय है, उन भगवान त्रिलोचन को मैं मस्तक झुकाकर बारंबार नमस्कार करता हूँ।
नमामि कारुण्यकरभवस्या भयंकरं वापी सदा नमामि।
नमामि दातारंभीप्सितानां नमामि सोमेशमूमेशमादौ।। ५
करुणा करने वाले शिव को प्रणाम करता हूँ , तथा संस्कार को भय देने वाले भगवान् भूतनाथ को सर्वदा नमस्कार करता हूँ। मनोवांछित फलो के दाता महेश्वर को प्रणाम करता हूँ। भगवति उमा के स्वामि श्री सोमनाथ को नमस्कार करता हूँ।।५
नमामि वेदत्रयलोचनं तं नमामि मूर्तित्रयवर्जितं तम।
नमामि पुण्यं सदसदव्यतितं नमामि तं पापहरं नमामि।।६
तीनो वेद जिनके तीन नेत्र है ,उन त्रिलोचन को प्रणाम करता हूँ। पुण्यमय शिव को प्रणाम करता हूँ। सत्य -असत्य से पृथक परमात्मा को नमस्कार करता हूँ। पापो को नष्ट करने वाले भगवान् हर को प्रणाम करता हूँ।
नमामि विश्वश्य हिते रतं तं नमामि रूपाणि बहूनि धते।
यो विश्वगोप्ता सदसत्प्रणेता नमामि तं विश्व्पतिं नमामि।।७
जो विश्व के हित में लगे रहते हैं , बहुत-से रूप धारण करते हैं , उन भगवान् शंकर को मै प्रणाम करता हूँ। जो संसार के रक्षक तथा सत्य और असत्य के निर्माता हैं , उन विश्वपति (भगवान् विश्वनाथ ) को मै नमस्कार करता हूँ, मै नमस्कार करता हूँ।।
