तुम्हारी यादो का पहड़ा।![]() |
| तुम्हारी यादो का पहड़ा। |
तनहाई पर तेरा पहरा था ही,
भीड़ में भी गुमसूदगी लगा रखी है।
जैसे पहड़ा हो मेरी साँसों पर।
पहड़ा मेरी हर यादों पर , मेरी हर बातों पर।
हर याद तुमसे सुरु, हर बात तुमपर खतम।
मेरी हर शब्द तेरे , उनकी हर अर्थ तुमतक।
उषा की रेशमी किरण से,
निशा की तारों से श्रृंगार तक,
बस तुम और तुम्हारी यादो का पहड़ा।
हो कोई बात नई!जिक्र गवारा तुम बिन नही।
तुम्हारी मुस्कान से,हमारी विरह गान तक,
चर्चे, बस तुम्हारी यादो के तुम्हारी बातों के।
ख्याल भी तो तुम बिन सजते नही,
या हो कोई महफ़िल तुम बिन जँचते नही।
तनहाई पर तेरा पहरा था ही,
भीड़ में भी गुमसूदगी लगा रखी है।
✍️Upeksha❣️
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