ज़िन्दगी की किताब।,कविता, अभिव्यक्ति,100 and above shayri collection

ज़िन्दगी की किताब।(poetry collection)


1* रिस्ता, तेरे और मेरे मन का।


Rista tere aur mere mn ka(you tube video)

रिस्ता, तेरे और मेरे मन का।

दिन और रात हो जैसे।

कभी मुक़म्मल मिलना भी नही,

कभी जुदा हुए भी नही।


रिस्ता, तेरे और मेरे मन का।

नदी के दो तीर हो जैसे।

तुझसंग बात बनती नही,

तुझबिन कोई बात होती नही।

रिस्ता, तेरे और मेरे मन का।


रिस्ता, तेरे और मेरे मन का।

और क्या कहे भला!

दरम्यां जब खमोशियाँ घर करती है,

फिर उसकी शोर शहर सहती है।

जुबाँ ख़ामोश, आँखे नम होती है।

रिस्ता, तेरे और मेरे मन का।




2* ज़िन्दगी की किताब।

 ज़िन्दगी की किताब।



ज़िन्दगी की किताब।


तुम्हारी यादों के सहारे,
ज़िन्दगी की पूरी किताब लिखना चाहती हूँ,
तुम वो क़िताब पढ़ने आओगे न?


वक्त-वे-वक्त, ईशारे में ही सही,
ज़िन्दगी में पड़ी धुंध हटाओगे न?
हक़ीकत नहीं, ख़्वाबों में ही सही,
फुर्सत से कभी,
वो क़िताब तो पढ़ने आओगे न?


उसे ज़ल्दी में ही पढ़ लोगे?
मामूली नही,
पूरी जिंदगी की होगी किताब मेरी।
पूरी इत्मिनान दिखाना,
संजीदगी से।


Tum vo kitab padhne aaoge n? (You Tube video)

जाने किस बात की हड़बड़ी थी!
चले गए,
पर ज़िन्दगी के उलझे शब्दों को...
सुलझाओगे न?
सांत्वना ही सही देने आओगे न?


बहुत कुछ अनसुलझा सा है,
तुम बिन आसान नहीं होगा,
ज़िन्दगी की हर डोर सुलझाना है,
आओगे न ?
तुम मेरी ज़िन्दगी की किताब,
पढ़ने आओगे न?






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