एहसास_ehsaas
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| एहसास, ehsaas, शायरी,कविता। |
एहसास
ehsaas, शायरी,कविता।
कुछ तो एहसास बाकी है......
मेरे एलबम में पड़ी,
इन सूखे पत्तियों में भी,
जिसे प्यार का सेतु समझा,
कैसे मेरे घर मे दौड़ती खुशियों
के नर्भ से कतरा-कतरा चूस गई।
न! हटाऊंगी नही,
सबक है संजो कर रखूँगी।
तेरी हर नाफ़रमानी भरी याद को।
वो दौर अलग था,
वो नाराज़गी अलग थी,
तुम्हे ब्लॉक कर तुम्हे ही ढूंढा करती थी,
ये दौर अलग है, तुम सामने तो रहोगे,
पर नजरअंदाज रहोगे।
✍️Upeksha❣️
