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 Jindgi, ज़िंदगी, quotes, शायरी, कविता

Jindgi, ज़िंदगी, quotes, शायरी, कविता।


तुझे पाने की चाह में,
कतरा-कतरा तुझे ही
खोती जा रही हूँ ऐ ज़िन्दगी,
उधार के लोग, ख़रीदी हुई मुस्कान
पर आज बस तेरे नाम,
मैं और तुम में शामिल ये रात।
और मुझे मेरी ज़िंदगी से मुलाक़ात।
कितना तुमसे मिली,
और कितने बेवजह ही खर्च की।
कुछ वो लोग भी, जो नाक़ाबिले,
ज़िन्दगी से मिले बनके गर्दिशे हालात,
कुछ हिसाब उनके भी, कुछ सीख उनसे भी।
आ ज़िन्दगी करूँ मैं तुमसे खुलके बात।
न चाँद, न चाँदनी,न ही तारों की बारात।
बस मैं, तुम और ये निशा रात।
बस इत्मिनान, न शोर, न पाबन्दियों का जोड़।
कतरा-कतरा जितना खोया,
आज बस उन सबका कर लूं हिसाब।
आ ज़िन्दगी, मैं बस कर लूं तुमसे मुलाकात।


✍️Shikha Bhardwaj❣️

Shikha Bhardwaj

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1 Comments

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  1. बहुत खूब अंदाज़ निराला है कविता का,खुशी हुई मुझे आप अच्छी कविता लिखतीं है

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