तुम्हारे एहसास![]() |
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तुम्हारे एहसास
माना तुम नही हो,
तुम्हारे एहसासों की बारिश क्या कम है।
हर कण, हर एहसास, हर विश्वास में तुम हो।
कभी जब चाय बनानी पड़ जाए,
उस सितम के एहसास की सिहरन में भी तुम हो।
बूकसेल्फ़ से झाँकती हर किताब में तुम हो।
तुम तो डायरी में करीने से लिखे
हर हिसाब में बेहिसाब तुम हो।
तुम नही,
तुम्हारे एहसासों की बारिश क्या कम है।
हंसे जमाना हो गया,
फ़ीकी मुस्कुराहटों के दबे दर्द
के एहसास में भी बेहिसाब तुम हो।
कोई शौख नहीं कि तुम भी समझो ये दर्द मेरा,
जहाँ हो, वहीं रहो, मिले बेहिसाब शुकूँ तुम्हे
रहे सदा संग मेरे आशीर्वाद तेरा।
✍️Upeksha❣️
