हौसले



हौसले


 ये जो ठोकर लगी...

 लड़खड़ाई हूँ मैं....

मेरे भटके हुए खयालात रहे हैं....

पीछे छूट गई है.....।

अब जो है सामने खड़ा है...

उँची उड़ान....

हौसलो से भरा मुक़द्दर मेरा।

डर है...न सुन ले दरो दिबार मेरे।

इनके पास सबक और सुझाव बहुत हैं,

वक्त के थपेड़ों से मरहम... बनाने होंगे।

खरीद लूँ इसे जहाँ से...वो बाज़ार नही है।

अपनो की कमी नही हैं, हर रिस्ते भरपूर मेरे,

लेकिन जो साया था मेरा, अंधेरे में साथ छोड़ चले मेरे।

अब जो साथ है, शिर्फ़ है हौसले मेरे,

मुझी को ठीक करने पड़ेंगे , बिगड़े मुक़द्दर मेरे।

देखना है, प्रभु के और कितने उपकार मेरे,

देगा, उलझनों से आज़ादी या लेगा और इम्तिहान मेरे।

जो करे, पर हौसलों की बरक़त बनाए रखे मेरे।


                                ✍️Upeksha❣️


 


 

Shikha Bhardwaj

Hi, I'm Shikha. I help English learners improve vocabulary, grammar, speaking confidence, and communication skills through practical lessons and real-life examples.

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