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आँखे मेरी,
सोई नही बहुत दिनों से,
एक आँसू का कतरा है,
जो तेरी, याद समेटे हुए हैं
डर है कि पलक ढ़लते ही,
वो ढल न जाए कहीं।
एक जज्ब है
जो ज़िन्दगी समेटे हुए है,
वरना इसकी भी,
शाम हो गई होती कभी।

    


✍️Shikha Bhardwaj❣️


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