मुन्तशिर लफ़्ज
मेरे अल्फ़ाज़
Muntshir lafj.
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| मुन्तशिर लफ़्ज,परीचितअभिव्यक्ति मुन्तशिर लफ़्ज। |
मेरे अल्फ़ाज़,मेरा साथ नही देते।
कड़ियों को जोड़े कैसे?
हर लफ़्ज मुन्तशिर हुए पड़े हैं।
इश्को की माला जोड़े कैसे ?
पढ़ सकते हो, तो पढ़ो मेरी आँखों को,
जो न कह सकी, तुम समझो उनको,
समझों कि ये इम्तेहां है तुहारी,
न समझ सके तो ,
तो ये प्यार का चोला क्यो ओढ़े खड़े हो।
तुम जो हो, क़िरदार में आओ जरा।
कभी तो जाहिर होगी न जग में!
दिलों की ये दूरियां जो बढ़ने लगी है।
या तो साँसों को घुल जाने दो,
या फिर आज़ाद करो इनको।
शिश्कियाँ जो बेदम होने लगी है।
जो न कह सके मेरे लफ़्ज,
तुम समझों उनको।
✍️Shikha Bhardwaj❣️
