Darakht,दरख़्त |
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Darakht,दरख़्त |
तमाशाइयों के
बीच रहते हैं...
बांई तरफ...
दिल नही...
सूखे दरख़्त
लगा रखें हैं।
अब हम भी...
कुछ उनकी तरह..
उन्ही का हाल जान....
उनकी जान को...
उन दरख़्तों पर...
टांग कर सुखाते हैं..
| ✍️Shikha Bhardwaj❣️ |