पगली_सी_वो_लड़की

 पगली सी वो लड़की,pagli si vo ladki.




Pagli si vo ladki,पगली सी वो लड़की


पगली सी वो लड़की,pagli si vo ladki


पगली सी वो लड़की...
हमेसा ही मुस्कुराती रहती थी...
शायद ख़ुद को ही झूठ बयाँ करती रहती थी..

हुआ कुछ यूँ...
मैंने भी मुस्कुराते हुए...

ख़ुशी उसकी बढ़ानी चाही...
मोम की निकली पगली...
वो तो बस पिघलती ही गई।
ज़रा सी अपनेपन की तपिश में...
उसकी आँखें बहने लगी!

पगली थी .......!
गले लगाने से रोते हैं....?

मुस्कुराते चेहरे, बहते अश्रु...
लाखो सवालों के बबंडर छोड़ गई...
पगली सी लड़की ही थी...

दर्द को मुस्कुराहटों में छुपाने का....
हुनर ख़ूब जानती थी।
ख़ुद से ही झूठी ख़ुशी बयाँ करती थी।

न जाने दिलों में कितने दर्द के दरियाँ

बना रखी थी,

एक प्यारी सी थपकी क्या मिली!

उस दरियाँ में तो वो....

मुझे ही डूबा निकली...

पगली सी वो लड़की, 

बड़ी ही सयानी निकली।



✍️Shikha Bhardwaj❣️




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