शरद पूर्णिमा की चाँदनी..2022
Sharad Purnima ki Chandni 2022
शरद पूर्णिमा की चाँदनी..2021 |
शरद पूर्णिमा की चाँदनी..2022
शरद पूर्णिमा की चाँदनी..
सज कर खिड़की पर आई है।
टुकुड़-टुकुड़ कभी मैं उसे देखूँ!
कभी ताक-झाँक करे चाँदनी।
सज कर खिड़की पर आई है।
टुकुड़-टुकुड़ कभी मैं उसे देखूँ!
कभी ताक-झाँक करे चाँदनी।
क्या है...?क्यूँ इतना इठलाई आज?
जानती हूँ.. माँ ने है खीर बनाई आज,
कुछ स्वाद माँ की हाथों का तो,
कुछ अमृत चाँदनी की भी घोलेगी आज,
शरद पूर्णिमा की चाँदनी आई आज।
खाएगी वही खीर या दूध-पोहे पाएगी आज?
चाहे जो खा.. पर मुझे भी देना,
बिखेर चाँदनी की शितलता...
फिर हम सब भी मिल खाएँगे।
बिखेर चाँदनी की शितलता...
फिर हम सब भी मिल खाएँगे।
उस खीर को देना अमृत बना।
शुक्रिया शरद चाँदनी..
जो भी है, पर छटां चाँदनी में...
जो भी है, पर छटां चाँदनी में...
फिर अगले वर्ष ही आ पाएगी तू।
सबके मन को हर्षित करती तू।
निर्मल हो जाता, हर अन्तर्मन.…
और नई कविता गढ़ जाता...
बैठ चाँदनी की छाँव में...
हर मन एक नया कवि बन जाता।
और नई कविता गढ़ जाता...
बैठ चाँदनी की छाँव में...
हर मन एक नया कवि बन जाता।
शरद पूर्णिमा की चाँदनी..
सज कर खिड़की पर आई आज।
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✍️Shikha Bhardwaj❣️