Tum ho,तुम हो
Tum ho,तुम हो
Tum ho,तुम हो,quotes, शायरी |
तुम नही हो पास मेरे मगर....
मेरे ख़यालो में रूबरू पूरा तुम हो।
झनकृत आवाज़ों की कशिश में...
जुस्तजू बस तुम हो।
देखा है हमने......
टहनियों से सूखे पत्ते को गिरते..
लेक़िन फ़िर उनमें जो बहार आती है...
उस बहार में तुम हो।
गगन में जो चाँद चमकता है,
उसकी चाँदनी के मुस्कान में तुम हो
देखा है हमनें उसमे अक्स तुम्हारा..
वही आँखो में चमकती मुस्कान लिए तुम हो।
तुम्ही तो हो, जो यादों में भी अपने से हो।
वरना कहाँ! आजकल तो साये भी पराये से हैं।
कैसे कह दूँ कि तुम पास नहीं हो मेरे,
तन्हाई में ...,महफ़िल में...
खामोशी की आवाज़ में तुम हो।
समन्दर की शांति सी आगाज़ में तुम हो,
लहड़ो की मदमस्त चुलबुली अंदाज में तुम हो।
तुम्ही तो हो, जो अभी पूरा भिगाकर गई है मुझे
और लिखा था जो नाम रेत पर......
उसे भी साथ ले गई, और तन्हा कर गई है मुझे।
क्या कहूँ के तुम मेरे शुख की या दुख की वज़ह हो
पर तुम हो, हाँ बस तुम हो।
वक्ते हालात के दरों-दिबार से बनी...
आशियाने की किताब के हर....
तहरीर में तुम हो।
तुम थे, तुम हो, तुम रहोगे....
✍️Shikha Bhardwaj ❣️