मैंने ईश्क़ ही उल्फ़त से कर ली है।
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| मैंने ईश्क़ ही उल्फ़त से कर ली है, quotes,शायरी |
मैंने ईश्क़ ही उल्फ़त से कर ली है।
जहन में कोई इस कदर घर कर गया...
कि मेरी ईश्क़ को ही उल्फतो का सहर कर गया।
अब इस सहर में मैं हूँ, मेरी तन्हाई है,
और उल्फतों की सरगोशियाँ हैं।
मेरी ईश्क उल्फतों से जो ठहरी।
क्या कहूँ कि किस मुक़ाम पर छोड़ गया
ख़ुद तो रहा नही...उल्फतों की सिफारिश कर गया।
वो दूर... बहुत दूर होकर भी...
धड़कनों पर वाबस्ता नाम लिख गया।
वक्त कहाँ रुकता है..सो रुका नही।
पर मेरी तन्हाइयों का हमसफ़र होकर गया।
वो शुकूँ में हो....तो चैन मिले मुझे भी
मैंने भी तो ईश्क़ उल्फ़त से ही कर ली है।
सितम तो है कि वो मेरे पास नही...
पर कौन कहे कि वो मेरे करीब नही।
कि वो है... मेरा,लेक़िन मेरा रहा नही।
चलो कोई नही....
इस पार नही....उस पार मिलेंगे।
पर मिलेंगे सही...।
ईश्क़ ये मेरी.. उल्फतों से जो ठहरी।
देर ही सही यकीन आया कि उस जैसा कोई नही।
विश्वास भी ये जीने के लिए कम नही।
जहन में कोई इस कदर घर कर गया...
कि मेरी ईश्क़ को ही उल्फतो का सहर कर गया।
मैंने ईश्क़ ही उल्फ़त से कर ली है।
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Aparichita
Aparichita हरदम हरवक्त आपके साथ है। Aparichita कुछ अपने, कुछ पराए, कुछ अंजाने अज़नबी के दिल तक पहुँचने का सफर। aparichita इसमें लिखे अल्फ़ाज़ अमर रहेंगे, मैं रहूं न रहूं, उम्मीद है, दिल के बिखड़े टुकड़ो को संभालने का सफर जरूर आसान करेगी। aparichita, इसमें कुछ अपने, कुछ अपनो के जज़बात की कहानी, उम्मीद है आपके भी दिल तक जाएगी।
