शारदिय नवरात्रि 2022 के पाँचवे दिन स्कंदमाता की पूजा, उनका अवतार, कौन है स्कंदमाता? उनकी महिमा।
Kshatriy-navratri-2022-ke-paanchve-din-skand-mata-ki-puja-unka-avtar-kaun-hai-skand-mata-unki-mahima
![]() |
शारदिय नवरात्रि 2022 के पाँचवे दिन स्कंदमाता की पूजा, उनका अवतार, कौन है स्कंदमाता? उनकी महिमा। |
शारदिय नवरात्र का महापर्व चल रहा है, और आज 30/09/2022, यानी नवरात्र का पाँचवा दिन है, और आज के दिन स्कन्दमाता की पूजा की जाती है।
सब स्वरूपों की तरह ये स्वरूप भी माँ दुर्गा का ही है।
माँ दुर्गा के पांचवे विग्रह या स्वरूप का अवतार क्यों और कैसे हुआ ? माता के गोद में एक छह मुख वाले बालक को दिखाया जाता है, वो बालक कौन है?
माँ स्कन्दमाता का स्वरूप देखकर सभी के मन मे इस प्रकार के सवाल जरूर उठते होंगे।
तो आइए उन सारे सवालों के जबाब जानने की कोशिश करेंगे।
सबसे पहला सवाल, कि कौन हैं स्कंद माता ?
पुराणों के अनुसार, चार भुजाओं वाली देवी, माता पार्वती और दुर्गा का ही स्वरूप स्कन्द माता है। ये माता भी शेर की ही सवारी करती हैं और और इनके एक कर में कमल, तो दूसरे कर में छह मुख वाले, उन्ही के पुत्र स्कन्द अथवा कार्तिकेय जी विराजे हुए हैं। कार्तिकेय जी का ही दूसरा नाम स्कन्द कुमार है, स्कन्द कुमार की माँ होने के कारण उनका नाम स्कन्दमाता पड़ा।
माँ दुर्गा को स्कन्द माता के स्वरूप में आख़िर क्यों अवतार लेना पड़ा ? नज़र डालते हैं, स्कन्द माता के अवतार लेने के कारण पर:--
पौराणिक कथाओं और पुराणों के अनुसार, तरकासुर नाम एक राक्षस, जिसका अत्याचार इतना बढ़ने लगा था कि देवी, देवता, मनुष्य, गंधर्व, ऋषि-मुनि आदि सभी चिंतित रहने लगे थे। जब उन्हें कोई उपाय नहीं सूझा तो वे सब माता पार्वती के पास गए और तरकासुर के अत्याचारों से और उनसे मुक्ति दिलाने की प्रार्थना करने लगे।
माँ अपने भक्तों का कैसे नही सुनती, इसलिए उन्होंने सभी देवगन, ऋषिमुनियों गंधर्व आदि सबको तारकासुर से बचाने के लिए आस्वस्त किया, तत्पश्चात माता पार्वती ने अपने तेज से छह मुखवाले स्कन्द कुमार को जन्म दिया। वही स्कन्द कुमार ने तारकासुर को मारकर सभी देवता,ऋषिगण, गंधर्व आदि को मुक्ति दिलाई। माता के तेज से हुए पुत्र स्कन्द कुमार से तारकासुर का वद्ध हुआ था, स्कन्द कुमार की माँ होने के कारण माता पार्वती का नाम स्कन्दमाता पड़ा।
स्कंदमाता सभी के लिए मोक्ष के द्वार भी खोलती है, इसलिए उन्हें मोक्षदायिनी माता के रूप में भी पूजा जाता है। स्कंदमाता का मन बड़ा कोमल है, वो अपने भक्तों की समस्त कामनाओं की पूर्ति करती हैं। माँ दुर्गा के पंचम स्वरूप देवी स्कंदमाता की उपासना करनी चाहिए, जिनसे उनके भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी हो और जीवन में खुशियों का संचार होता रहे। संतान प्राप्ति, धन वैभव आदि के लिए स्कंदमाता की आराधना करनी चाहिए। माता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी है, इसलिए इनकी पूजा से भक्त अलौकिक तेज को प्राप्त कर कांतिमय हो जाता है।
आगे जानते हैं, माँ स्कंदमाता के स्वरूप और उनकी पूजा विधि के बारे में:--
![]() |
|
स्कंदमाता का स्वरूप :-
स्कंदमाता का स्वरूप बड़ा ही कांतिमय और मन को मोहने वाला है। स्कंदमाता चार भुजाओं से सुशोभित हैं,इनके दो हाथों में कमल और गोद में पुत्र कार्तिकेय बाल रूप में हैं, जिन्हें स्कन्द के नाम से जानते हैं। स्कंदमाता सिंह की सवारी करती है, शेर पर सवार होकर मां दुर्गा अपने पांचवें स्वरूप यानी स्कंदमाता के रूप में भक्तजनों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहती हैं।
स्कंदमाता पूजा की विधि क्या है?
नवरात्रि के पांचवे दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर सबसे पहले स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए, फिर घर के मंदिर या पूजा स्थल में चौकी को गंगाजल से शुद्ध करके स्कंदमाता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए।
एक कलश में जल लेकर उसमें कुछ सिक्के डालकर, उसे भी गेहूँ के एक छोटा सा ढेर बनाकर उसपर उस कलश को स्थापित करे।
तत्पश्चात स्कन्दमाता के पूजा का संकल्प लेते हुए उन्हें रोली-कुमकुम लगाकर, नैवेद्य अर्पित करन चाहिए। नैवेद्य में केले का भोग अवश्य लगाएं। अब सुगंधित धूप-दीप जलाकर उनका ध्यान मंत्र आदि करने के बाद, माता की आरती करनी चाहिए, उसके बाद घर के सभी लोगों में प्रसाद बांटकर, आप भी उस प्रशाद को ग्रहण करें।
स्कंदमाता को नीले रंग बहुत पसंद है, इसलिए आओ भी कोशिश नीले रंग के वस्त्र धारण करने की ही कोशिश करें।
स्कंदमाता की कथा:--
![]() |
स्कंदमाता की कथा:-- |
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक अति बलशाली राक्षस तारकासुर था। उसे वरदान प्राप्त था कि वह केवल शिव के पुत्र के द्वारा ही मारा जा सकता था, और उसका अत्याचार दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा था। तब माता पार्वती ने अपने तेज से पुत्र भगवान स्कन्द (कार्तिकेय का दूसरा नाम) को जन्म दिया और उन्हें युद्ध के लिए प्रशिक्षित करने हेतु स्कन्दमाता का रूप धरा। देवी ने भगवान स्कन्द को युद्ध के लिए प्रशिक्षित किया था। कहा जाता है कि स्कंदमाता से युद्ध प्रशिक्षण लेने के पश्चात भगवान स्कंद ने तारकासुर का वध किया और माता पार्वती स्कन्दमाता के नाम से प्रशिद्ध हुई।
#अध्यात्म, #अपरिचिता, #अभिव्यक्ति, #नवरात्रि, #हमारी संस्कृति, #abhivaykti, #adhyatm, #Aparichita
जय माता दी।


