तमाशो के बाज़ार में... जज़बात ढूंढ़ने चले फिर क्या गिला कि हम खुद से ही बेख़बर निकले_tamaasho ke bazaar me...Jajbaat dhundhne chale..,fir kya gila ki hm khud se hi bekhabar nikle.

तमाशो के बाज़ार में... जज़बात ढूंढ़ने  चले_tamaasho ke bazaar me...Jajbaat dhundhne chale.



तमाशो के बाज़ार में... जज़बात ढूंढ़ने  चले 


तमाशो के बाज़ार में... जज़बात ढूंढ़ने  चले 



तमाशो के बाज़ार में... जज़बात ढूंढ़ने  चले 
फिर क्या गिला कि हम खुद से ही बेख़बर निकले।

यहाँ रुसबाइयों का शोर तो बहुत है...
दिल के टूटने की आवाज़ फ़क़त दफन निकले।

क्या कहूं तुझसे ऐ वक़्त...
जिस क़दर तू मेरा कभी हुआ नही...
जरा धड़कनों से भी तो सिफारिश कर... 
कि वो भी वेवफ़ा निकले।

छोड़ दें मेरा साथ….
कि मैं भी अब धुँआ होना चाहती हूं..
थक गई हूं, कि साँसों का बोझ बड़ा कठिन है...
सभी खुश रहे और मेरी जान बेदम निकले।

जाने किसकी कर्जदार रही ये ज़िन्दगी...
मौत आई नही...और एक पल जीने को न मिले।

महफ़िल सजाने निकले थे, मगर
खामोशियों के शोर बड़े बेरहम निकले।
दफ़नाकर मेरे सारे अरमान... 
मेरी ख़बर लेने निकले।

तमाशो के बाज़ार में... जज़बात ढूंढ़ने  निकले 
फिर क्या गिला कि हम खुद से ही बिखरे पड़े मीले ।





तमाशो के बाज़ार में... जज़बात ढूंढ़ने  चले_tamaasho-ke-bazaar me-Jajbaat-dhundhne-chale.

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                     ✍️Shikha Bhardwaj❣️


Shikha Bhardwaj

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