गम-Gam![]() |
| Gam-गम गम-Gam |
चाहे, जो बाँट लो जहां में,
भूले से भी गम न बांटना
मुमकिन है कि हमदर्दी मिल जाए,
हमदर्द न मिलेगा।
तुम्हारे किस्से उधरेंगे जरूर,
पर दर्द सील जाए,
वो धागा न मिलेगा।
बंद कमरे में चिल्ला लेना,
पर जग ज़ाहिर,
सिसकियाँ भी न करना।
चाहे, जो बाँट लो जहां में,
भूले से भी गम न बांटना
चाहे ओढ़ लो घूँघट,
गर मुस्कुरा न सको,
आँखे गीली तुम यूँ,
किसी के दरम्यां न करना।
गर है चढ़ी हौसलों की सीढियां,
नजरें करम की झेल न पाओगी,
इसलिए चेहरे को हँसी के
लिबास पहनाए रखना ।
चाहे जो बाँट लो जहाँ में,
भूले से भी गम न बाँटना।
✍️ Shikha Bhardwaj❣️
