सावन की पहली सुबह।
![]() |
सावन की पहली सुबह। #सावन_savan #Aparichita |
सावन की पहली सुबह।
सावन की पहली सुबह, खिला हुआ धूप ,
धूप की किरणों से टकराती बारिश की बुंदे।
हो न हो,ये तुम्हारी ही यादों की बरसात है।
हर बूंद खुद में प्यार का सागर लिए बरस रही है,
जमीन पर गिरती घुंघरू सी ये बूंदे....
मेरे अरमानों को हवा दिए जा रही है।
तन भीगा पर मन मे अगन सा।
हो भी क्यूँ न!
सावन ही तो है.....
सब कुछ हरा ,मन भी हरा।
तुम्हारी यादों के अंजुमन में टहलते -टहलते ,
न जाने कब तुझमें ही खो गई हूँ।
देखो न, इन घुमड़ती बादलों को
कैसे, जैसे अभी छूकर गुजरी है मुझे ,
कुछ अनकही सी, कुछ अल्हड़ सी।
कानो में कुछ तो कहकर गुजरी है मुझे
जो मेरे ख्वाहिशों को पंख दे गई है।
सावन की पहली सुबह....
तुम्ही थे न!
जो बारिश की फुहार संग घुले थे
और झोंकें से छूते हुए गुजर गए थे।
सुनो! जानती हूँ कि सावन है,
तुम्हारी शरारतें बरसेंगी अभी,
मग़र ख़याल रहे,
सबकी खिड़की खुली है अभी...
सावन की पहली सुबह....
छूकर गुजर तो गए हो तुम!
पर मन सरोवर तक को प्यासा कर गए।
जानती हूँ की तुम बस एक छल हो।
जैसे पारिजात की पत्तियों से,
ये बुंदे फिसल रही हैं न!
तुम भी कभी मुझे समेट नहीं पाओगे।
सावन की पहली सुबह.....
सब जानती हूँ..... पर मन फतिंगा है, कहाँ मानता है।
दीपक के साथ जलना ही , इसके भाग्य लिखा है।
मुझे भी, तो जलना तुम्ही ने सिखाया है।
सावन की बूंदों संग ,उसकी हरियाली संग।
सावन की पहली सुबह......
साँसों में जो ये खुशबु घुली है,
देखो इससे जाश्मीन भी जली है।
और कितना लिखूं , अगर सावन जली
फिर कौन है, जो बुझा पाएगा।
छोड़ो, समेटो इन ख्यालो को,
और इन श्रावणी बूंदों को।
![]() |
#सावन_savan #Aparichita |


nice one
ReplyDelete🙏🙏
ReplyDelete