Jindagi_ज़िन्दगी
"Jindagi" जैसा सोचते हैं वेसी तो नही होती.... हाँ कदम-कदम पर नए ठोकड़ो से नए तज़ुर्बों से मिलाती रहती है। हम पूरे "ज़िन्दगी" का हिसाब कर बैठते हैं, लेकिन अगले ही पल क्या होगा? बस लम्हों में हैरान कर गुजर जाती है "ज़िन्दगी"। चार लाइने लिखी है, उम्मीद है, पसंद आएगी।
रोज नए तमाशों के बाजार से गुजरती है ज़िंदगी,
अब तो मुश्किलें भी ज़द में है
कि क्यों नही साँसों से रिश्ता तोड़ती है ज़िंदगी।
अज़ब सा फ़लसफ़ा है ये जिंदगी,
हर रोज खुद तो मरती है,
और नए ख्वाहिशों से रिश्ता जोड़ती है ज़िन्दगी।
जब देखों, हौसलों की दस्ताबेज बनाती है ये जिंदगी,
और तन्हा, कमड़े में हर पल बिखड़ती है ये जिंदगी।
मुस्कुरातें रहो, कि तुम्हारी वज़ूद बची रहे,
रोने वाले को और रुलाती है, ये ज़िन्दगी।
तुम्हारे हमदर्द, तुम्हारे आँसुओं से नही बनती,
कारवां तुम्हारे पीछे होगा, जब जेब हरी होगी,
और मुस्कुराएगी ज़िन्दगी।
#Jindagi_ज़िन्दगी
Jindagi-Aparichita
#kavita#quotes#kavita#शायरी#अभिव्यक्ति#Aparichita#Poetry#अपरिचिता,
#Aparichita हरदम हरवक्त आपके साथ है। #Aparichita कुछ अपने, कुछ पराए, कुछ अंजाने अज़नबी के दिल तक पहुँचने का सफर। #aparichita इसमें लिखे अल्फ़ाज़ अमर रहेंगे, मैं रहूं न रहूं, उम्मीद है, दिल के बिखड़े टुकड़ो को संभालने का सफर जरूर आसान करेगी। #aparichita, इसमें कुछ अपने, कुछ अपनो के जज़बात की कहानी, उम्मीद है आपके भी दिल तक जाएग
Shikha Bhardwaj___✍️

Very nice 👌👌
ReplyDelete