नेपोटिज्म-Nepotism
पर क्या नेपोटिज्म का इतना चर्चा होना जरुरी है,क्या नेपोटिज्म सिर्फ बॉलीवुड में है? सीर्फ नेपोटिज्म की चर्चा से शुशांत सिंह को इंसाफ मिल जायेगा। शुशांत सिंह की शायद हत्या हुई है, उसकी जाँच भी होनी चाहिए ,बॉलीवुड में नेपोटिज्म चरम पर भी है। बहुत स्ट्रगलिंग एक्टर का शोषण भी होता है। बहुतो के पास हुनर के बाबजूद उनको वो मुकाम नहीं मिल पाता जो वहां से सम्बंधित कलाकारों को मिल पाता है।
लेकिन ये क्या सिर्फ बॉलीवुड तक सिमित है। साधारणतः डॉक्टर का बेटा डॉक्टर ,व्यापारी का बेटा व्यापारी और जो सिबिल लाइन मे हैं वो भी चाहते है कि मेरा बेटा मुझसे भी अच्छा करे। कहने का अर्थ है हर कोई अपने लाइन में अच्छा करना चाहता है और अपने प्रोफेशन को आगे बढ़ाना चाहता है।
पॉलिटिक्स से अच्छा उदाहरण क्या होगा ? नेपोटिज्म के लिये, जो दूसरे को चांस देना ही नहीं चाहती। बेचारे राहुल गाँधी को ही ले लीजिये जिसे ठीक से ये पता नहीं होता कि उन्हें बोलना क्या है और क्या नहीं, लेकिन उनको अपने हाथ में पूरा देश चाहिए। अब तो उनके बहन की पूरी फैमिली भी शामिल हो गई है, लेकिन फिर भी हम नेपोटिज्म शब्द से दूर ही थे।
देश में सबसे बड़ा सबाल है आरक्षण का , जिसके तहत बड़े-बड़े पोस्ट पर बड़े ही आसानी से कम मार्क्स बाले भी कार्यरत हो जाते है और उसी फैमिली से जिनके पीढ़ी दर पीढ़ी आरक्षण का लाभ उठाया हो, पर कोई सबाल नहीं उठाता , क्या आरक्षण देश में इसीलिए लागू किया गया था ,या फिर गरीबो के लिए? क्यों न सरकार और न ही मीडिया इसपर कोई सबाल या कदम उठाती है? क्यों आजादी के बाद से देश में इतना बदलाव आया पर ये आरक्षण के नियम नहीं बदले। आरक्षण खत्म नहीं किया जा सकता लेकिन नियम तो बदले जाने चाहिए ,जिनको सच में इनकी जरूरत है, उन्हें तो मिलनी चाहिए
जो सच में उस पोस्ट के काबिल है, सभी विदेशो में नौकरी करने चले जाते हैं ,ये देश की कितनी बरी छती है? कौन इसके विरद्ध आवाज उठाएगा? कौन इस नेपोटिजम के खिलाफ बोलेगा क्यों इस लाइन में किसी को नेपोटिज्म नहीं दिखा ?
कई ऐसे भारतीय हैं जिन्होंने विदेशो में झंडे गारे है लेकिन उनके कारनामो पर नाम विदेशो का होता है. क्यों ये छती किसी को नहीं दिखती ? क्यों इस नेपोटिज्म के खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाया अब तक ?
क्या बॉलीवुड के रास्ते कदम पर चलते हुए हर फील्ड में या तो हत्या या आत्म हत्या जैसे जघन्य कदम उठाने की जरूरत है ?
क्या ये सोचने का विषय नहीं है की जब तक कोई बड़ी छती न हो तबतक हम सँभलने का प्रयास नहीं करते।
#नेपोटिज्म_Nepotism, #सामाजिक_अभिव्यक्ति, #social impact.

सरकार को वोट की जरूरत है। आरक्षण की सख्त विरोधी हूँ। पर कुछ लोगों को समझ नहीं आता की विरोध का मतलब हमारा जलन नहीं। ये शब्द जिनके साथ जुडा है वो कमजोर हो रहे हैं। 👏👏
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