ये शाम भी कुछ मेरी तरह ही तन्हा सा है।
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Ye sham bhi meri tarah hi tanha sa(you tube video)
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ये शाम भी कुछ मेरी तरह ही तन्हा सा है। |
ये शाम भी कुछ मेरी तरह ही तन्हा सा है।
इसे भी छोड़ गया कोई अपना सा है।
पर यूँ मुँह फुलाए क्यों बैठा सा है ?
ये दिन भले ही अलविदा कह गया,
पर रात तो तेरा अपना सा है।
ये शाम भी मेरी तरह ही तन्हा सा है ।
नज़र उठा देख जरा, दिन छोड़ गया,
रात तो बाँहें फैलाए सा है।
टिमटिम सितारों की बारात संग
मन्द मुसकाती पवन लोड़ी सा है।
ये शाम भी मेरी तरह तन्हा सा है।
रख इसकी आगोश में सर,
ये रात भी तेरी माँ सी है
सोच जरा कितने हैं,
जिनका कोई न अपना सा है।
कई तो बेटियां भी हैं,जिनका
अपनी माँ से भी रिश्ता अनजाना सा है।
ये शाम भी मेरी तरह ही तन्हा सा है।
किसी ने पुछा है मुझसे,
ये उपेक्षा भी क्या नाम सा है?
क्या बताऊँ उसे की ये नाम भी
मेरे जिंदगी सा है।
जिसे मैंने खुद ही रखा सा है।
ये शाम भी कुछ मेरी तरह ही तन्हा सा है।
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✍️Shikha Bhardwaj ❣️
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